Ayodhya Trust Scam Recovery: राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की खबर और ट्रस्ट के बड़े चेहरों के इस्तीफे तो अब हेडलाइंस बन चुके हैं। लेकिन कैमरे की फ्लैशलाइट से दूर, लखनऊ और अयोध्या के बंद कमरों में जो सबसे बड़ा सवाल तैर रहा है, वह यह नहीं है कि चोरों को क्या सजा मिलेगी। असली सवाल यह है कि रामभक्तों की आस्था का जो पैसा चोरी हुआ, सरकार उसे वापस कैसे लाएगी?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवरों से साफ है कि उनका फोकस सिर्फ आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने पर नहीं है। लखनऊ से आए कड़े निर्देशों के बाद स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का पूरा गियर बदल चुका है। अब यह केस सिर्फ 8 नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं रह गया है; बल्कि उनके सगे-संबंधियों, बेनामी बैंक खातों, जमीन के कागजातों और एक ऐसे छुपे हुए नेटवर्क तक पहुंच गया है जिसने मंदिर के भीतर ‘चोरी का समानांतर सिस्टम’ चला रखा था।
8 ‘चोर’ और 80 को नोटिस: कैसे फैला सिंडिकेट का जाल?
शुरुआत में लगा था कि यह कुछ सुरक्षाकर्मियों या निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत का छोटा मामला है। पुलिस ने शुरुआती दौर में 8 लोगों को दबोचा:
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव (महासचिव चंपत राय का पूर्व ड्राइवर)
- अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा (कैश काउंटिंग टीम)
- अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे (नोटों को काउंटिंग रूम तक ले जाने वाले)
- सुभाष श्रीवास्तव (कैश काउंटिंग प्रभारी)
लेकिन जैसे ही एसआईटी ने इन ‘छोटी मछलियों’ के मोबाइल खंगाले और बयान दर्ज किए, पूरी तस्वीर पलट गई। अब तक पुलिस और एसआईटी करीब 70 से 80 लोगों को आधिकारिक नोटिस थमा चुकी है। इस रडार पर सिर्फ आरोपी नहीं हैं, बल्कि बैंक कर्मचारी, सुरक्षा स्टाफ, मंदिर के नोडल अधिकारी और काउंटिंग टीम के कई अन्य सदस्य शामिल हैं। एसआईटी यह देख रही है कि यह कोई अचानक हुई चोरी थी या महीनों से चल रहा एक संगठित संस्थागत सिंडिकेट। Ayodhya Trust Scam Recovery
SIT की महा-जांच: आरोपियों के ठिकानों से क्या-क्या मिला?
नीचे दी गई तालिका में एसआईटी और पुलिस द्वारा की गई छापेमारी के दौरान अब तक की गई आधिकारिक बरामदगी का पूरा ब्यौरा है:
| आरोपी का नाम | बरामद नकद (Cash) | अन्य कीमती सामान / संपत्तियां |
| अविनाश शुक्ला | ₹20.39 लाख | 1121 अमेरिकी डॉलर, 14 ग्राम सोना, 54 ग्राम चांदी |
| करुणेश पांडे | ₹18.07 लाख | संदिग्ध बैंक ट्रांजैक्शन |
| अनुकल्प मिश्रा | ₹16.82 लाख | ₹65 लाख का फार्महाउस, नई स्कॉर्पियो गाड़ी |
| लवकुश मिश्रा | ₹14.25 लाख | लॉकर से बरामदगी (गोबर के ढेर के नीचे छुपाने का आरोपी) |
| रमाशंकर मिश्रा | ₹7.32 लाख | अघोषित नकद |
| मनीष यादव | ₹2.00 लाख | संदिग्ध वित्तीय लेन-देन |
| टिन्नू यादव (ड्राइवर) | ₹1.00 लाख | कमरे में रखे स्टील के डिब्बे से बरामद |
| सुभाष श्रीवास्तव | ₹0.00 (शून्य) | लापरवाही और कथित मिलीभगत के आरोप में अरेस्ट |
कुल रिकवरी: अब तक लगभग ₹79.85 लाख कैश, विदेशी मुद्रा और भारी मात्रा में सोना-चांदी आधिकारिक तौर पर बरामद किया जा चुका है। लेकिन एसआईटी का मानना है कि यह तो सिर्फ ‘आइसबर्ग का सिरा’ है, असली चोरी की रकम करोड़ों में हो सकती है।
योगी सरकार की ‘थ्री-लेयर’ रिकवरी रणनीति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी को साफ कह दिया है कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की कोई जल्दबाजी नहीं है, बल्कि जांच को इतना पुख्ता किया जाए कि पाई-पाई वसूल हो सके। इसके लिए प्रशासन तीन स्तरों पर काम कर रहा है:
1. 7 बैंकों के खातों का फॉरेंसिक ऑडिट
पुलिस ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) समेत 7 अलग-अलग बैंकों से आरोपियों और उनके पूरे कुनबे के पिछले 5 साल के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड मंगवाए हैं। मजे की बात यह है कि एसबीआई ने इस वित्तीय विसंगति को लेकर पहले ही आंतरिक स्तर पर कुछ आशंकाएं जताई थीं। अब एसआईटी यह देख रही है कि जब बैंक को शक था, तो सिस्टम के किस अधिकारी ने इसे दबाने की कोशिश की।
2. अवैध संपत्तियों की पहचान और कुर्की
एसआईटी अब सिर्फ कैश नहीं ढूंढ रही। आरोपियों की घोषित आय (सैलरी) और उनकी असल संपत्तियों के बीच जो आसमान-जमीन का अंतर मिला है, उसने राजस्व विभाग को काम पर लगा दिया है। अनुकल्प मिश्रा के ₹65 लाख के फार्महाउस और नई गाड़ियों समेत सभी आरोपियों के प्रॉपर्टी रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जिन संपत्तियों का वैध स्रोत नहीं मिलेगा, उन्हें गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क (Attach) करने की तैयारी है।
3. ED की एंट्री और डिजिटल सबूतों का री-कंस्ट्रक्शन
इस घोटाले के तार मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ते देख पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी संपर्क साधा है ताकि मनी ट्रेल का पता लगाया जा सके कि चोरी का पैसा किस-किस रूट से कहां भेजा गया। इसके अलावा, तकनीकी टीम उन सीसीटीवी फुटेज को रिकवर कर रही है जिन्हें कैश काउंटिंग के दौरान कथित तौर पर ढक दिया गया था या डिलीट कर दिया गया था। डिलीटेड व्हाट्सएप चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। Ayodhya Trust Scam Recovery











