Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसके बाद गृह विभाग ने इसे आगे की कार्रवाई के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सुपुर्द कर दिया है। इस अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम शामिल नहीं है, जिससे दोनों को इस मामले में क्लीन चिट मिल गई है।
Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case: 13 जून को गठित हुई थी 3 सदस्यीय SIT
इस 3-सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को किया गया था।इस टीम की अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे, जबकि आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन कुमार इसके सदस्य थे। यह रिपोर्ट उस मूल एसआईटी द्वारा तैयार की गई है, जिसने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के किसी भी तरह के हस्तक्षेप या नई एसआईटी से पहले ही अपनी जांच पूरी कर ली थी।
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में केवल उन्हीं लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनके नाम 25 जून 2026 को दर्ज हुई पहली एफआईआर (FIR) में शामिल थे। इस FIR में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू (मुख्य साजिशकर्ता), अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा सहित 8 लोग नामजद थे, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपियों के खिलाफ IPC की धाराओं 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) और PC एक्ट की धारा 13(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया गया। (Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case)
CCTV में करीब 70 बार नकदी चोरी की गतिविधियां सामने आईं
जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज (27 अप्रैल से 5 जून 2026) में करीब 70 बार नकदी छिपाकर चोरी करने की गतिविधियां सामने आईं। रिपोर्ट में पाया गया कि ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन नहीं किया गया और नोटों की गिनती वाले कमरे में सुरक्षा की भारी चूक थी। जून 2026 में दान चोरी का यह विवाद सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जुलाई 2026 की शुरुआत में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
हालांकि राज्य सरकार की पहली एसआईटी ने अपनी क्लोजर या अंतिम रिपोर्ट में दोनों को क्लीन चिट दे दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित दूसरी एसआईटी की जांच अभी भी जारी है। इसलिए इस मामले में अंतिम कानूनी फैसला दूसरी एसआईटी की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा। (Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case)
चढ़ावा गबन की जांच के लिए SIT का पुनर्गठन, IG किरण एस. को मिली कमान
उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) का पुनर्गठन किया है और जांच में तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों को शामिल किया है। नवगठित SIT की अध्यक्षता आईजी किरण एस कर रही हैं, जिसमें डीआईजी अयोध्या सोमेन वर्मा और एसएसपी अयोध्या डॉ. गौरव ग्रोवर भी शामिल हैं।
इन कथित अनियमितताओं ने एक व्यापक राजनीतिक टकराव को जन्म दिया है, और यह मुद्दा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष के बीच विवाद का विषय बन गया है। कथित गबन की जांच जारी है, जबकि जवाबदेही को लेकर राजनीतिक विवाद और बहस की मांग तेज हो गई है। मामले की जांच जारी है और दान राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। (Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case)











