UP Assembly Monsoon Session: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र 2026 के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक सचिन यादव का निलंबन समाप्त हो गया है। विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे की ओर से जारी आदेश में निलंबन समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही जसराना से सपा विधायक सचिन यादव अब विधानसभा की आगामी कार्यवाही में सामान्य सदस्य के तौर पर हिस्सा ले सकेंगे।
मानसून सत्र के दौरान सचिन यादव का निलंबन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का प्रमुख मुद्दा रहा। सपा विधायक को सदन में विरोध प्रदर्शन और अध्यक्ष के निर्देशों की अवहेलना के आरोप में पूरे सत्र के लिए निलंबित किया गया था। सत्र समाप्त होने के बाद उनका निलंबन भी प्रभावी रूप से समाप्त हो गया।
UP Assembly Monsoon Session: इस वजह से हुआ था निलंबन
सचिन यादव के निलंबन का मामला 4 अगस्त 2026 को मानसून सत्र के दूसरे दिन सामने आया था। सपा विधायक अयोध्या में सामने आए कथित ‘चढ़ावा चोरी’ विवाद और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सदन में विरोध दर्ज करा रहे थे। वह विरोध की पट्टी बांधकर और हाथों में तख्तियां लेकर विधानसभा के वेल में पहुंच गए।
हंगामे के दौरान सचिन यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रामलला की तस्वीर वाला पोस्टर सदन में दिखाया और नारेबाजी की। विधायक की मांग थी कि अयोध्या से जुड़े मामले में एसआईटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री के पहले दिए गए ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करने के बयान का भी हवाला दिया।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सचिन यादव को सदन की मर्यादा बनाए रखने और अपनी सीट पर वापस जाने के निर्देश दिए। आरोप है कि बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद विधायक ने अपना विरोध जारी रखा। इसके बाद मार्शलों की मदद से उन्हें सदन से बाहर कराया गया और उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली, 2023 के नियम 299(1) के तहत पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। (UP Assembly Monsoon Session)
नियम के तहत खत्म हुआ निलंबन
विधानसभा सचिवालय ने 24 अगस्त 2026 को सचिन यादव के निलंबन को समाप्त करने संबंधी आदेश जारी किया। आदेश में उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली, 2023 के नियम 299(3)(ख) का जिक्र किया गया है। चूंकि सचिन यादव को ‘शेष सत्र’ के लिए निलंबित किया गया था, इसलिए मानसून सत्र के समाप्त होने के साथ ही निलंबन की अवधि भी पूरी हो गई। इस तरह अब विधायक पर उक्त निलंबन प्रभावी नहीं है और वह आगामी विधानसभा सत्र में अपनी सामान्य सदस्यता के साथ भाग ले सकेंगे।
निलंबन के बाद सपा ने सरकार पर साधा था निशाना
निलंबन के बाद सचिन यादव विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ गए थे। समाजवादी पार्टी ने कार्रवाई को विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताते हुए सरकार पर निशाना साधा था। सपा नेताओं का कहना था कि जनहित, छात्रों और आस्था से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना विपक्षी विधायकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। अब निलंबन समाप्त होने के बाद जसराना क्षेत्र में सपा कार्यकर्ताओं के बीच इसे राहत और विपक्ष की नैतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। (UP Assembly Monsoon Session)
भाजपा ने सदन की गरिमा और अनुशासन को बताया जरूरी
वहीं, सत्ता पक्ष और विधानसभा अध्यक्ष का रुख इससे अलग रहा। भाजपा और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सदन में अनुशासन और संसदीय मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया गया। सत्ता पक्ष का तर्क था कि अध्यक्ष के बार-बार निर्देशों के बावजूद सदन के वेल में जाकर पोस्टर दिखाना और नारेबाजी करना विधानसभा की गरिमा के अनुरूप नहीं है। सत्ता पक्ष के मुताबिक, सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी थी।
अगले सत्र में फिर आमने-सामने हो सकते हैं सपा-भाजपा
सचिन यादव का निलंबन समाप्त होना विधायी प्रक्रिया के तहत हुआ है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी खींचतान को एक बार फिर सामने ला दिया है। अयोध्या, कानून-व्यवस्था, छात्रों और रोजगार जैसे मुद्दों पर सपा लगातार सरकार को घेरने की कोशिश करती रही है। ऐसे में अगले विधानसभा सत्र में भी इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना बनी हुई है। (UP Assembly Monsoon Session)
सचिन यादव अब अगले सत्र में बतौर विधायक सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, मानसून सत्र में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर यह संदेश देता है कि विधानसभा के भीतर विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ सदन की निर्धारित मर्यादा और नियमों का पालन करना भी प्रत्येक सदस्य के लिए जरूरी है।










