Nagpur Gas Leak: महाराष्ट्र के नागपुर में सोमवार तड़के क्लोरीन गैस के रिसाव से गोधनी इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गोधनी स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से गैस लीक होने के बाद आसपास के रिहायशी इलाकों में इसका असर पहुंचा और कई लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 56 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ मरीजों को ICU में रखा गया है, हालांकि अधिकारियों के अनुसार भर्ती मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
Nagpur Gas Leak: आधी रात के बाद हुआ गैस रिसाव
यह घटना नागपुर के गोधनी इलाके में कलेक्टर कॉलोनी के पास स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में हुई। अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार तड़के करीब 12:10 बजे प्लांट में रखे एक रिजर्व क्लोरीन सिलेंडर से गैस का रिसाव शुरू हुआ। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब 900 किलोग्राम क्षमता वाले सिलेंडर की बाहरी दीवार में खराबी या संरचनात्मक क्षति के कारण रिसाव हुआ हो सकता है। हालांकि, गैस लीक होने की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्लोरीन गैस फैलने के बाद आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को खांसी, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गैस के प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने प्लांट के आसपास के इलाके को खाली कराया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। करीब 200 मीटर के क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई थी।
56 लोग अस्पताल में भर्ती, कई मरीज ICU में
गैस के संपर्क में आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। अलग-अलग समय पर सामने आई रिपोर्टों में अस्पताल में भर्ती लोगों की संख्या 40 से बढ़कर 52 और फिर 56 तक पहुंची। इनमें प्लांट के कर्मचारियों के साथ आसपास रहने वाले लोग भी शामिल हैं। कुछ नाबालिगों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। मरीजों में मुख्य रूप से सांस लेने में परेशानी, खांसी और गैस के संपर्क से होने वाली अन्य तकलीफें देखी गईं। कुछ मरीजों को ICU में भर्ती कराया गया है। नागपुर कलेक्टर कुमार आशीर्वाद के अनुसार, ICU में भर्ती मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है और अगले कुछ दिनों तक उनकी स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा।
NDRF और फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड, NDRF और अन्य आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं। सुरक्षाकर्मियों ने विशेष उपकरणों और Self-Contained Breathing Apparatus (SCBA) की मदद से रिसाव वाले क्षेत्र में प्रवेश किया। इसके बाद लीक हो रहे सिलेंडर को न्यूट्रलाइजेशन टैंक में डालकर कास्टिक सोडा के घोल की मदद से गैस के प्रभाव को नियंत्रित करने की कार्रवाई की गई। प्रशासन की कार्रवाई के बाद इलाके में गैस की सांद्रता धीरे-धीरे कम होने लगी। अधिकारियों ने लोगों से प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। सुबह तक स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में बताई गई।
900 किलो के सिलेंडर की खुले में स्टोरेज पर सवाल
हादसे के बाद प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नागपुर कलेक्टर ने बताया कि प्लांट में रखे 900 किलो के क्लोरीन सिलेंडर को पूरी तरह सील और सुरक्षित कमरे में रखा जाना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि खतरनाक गैस से भरा सिलेंडर खुले वातावरण में क्यों रखा गया था। कलेक्टर के मुताबिक, तकनीकी खराबी या सिलेंडर में जंग लगने जैसी वजहों की जांच की जा रही है। मामले की जांच के लिए एक तकनीकी समिति गठित की गई है, जिसे तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाएगी।
नागपुर के दूसरे प्लांटों की भी होगी सुरक्षा जांच
घटना के बाद जिला प्रशासन ने सिर्फ गोधनी प्लांट तक जांच सीमित नहीं रखने का फैसला किया है। नागपुर जिले में ऐसे सभी वाटर ट्रीटमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, जहां क्लोरीन या अन्य खतरनाक गैसों का इस्तेमाल या भंडारण होता है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। फिलहाल गोधनी गैस लीक मामले की जांच जारी है और अधिकारियों की नजर प्रभावित लोगों की स्वास्थ्य स्थिति के साथ-साथ प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी है।











