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पीलीभीत अनम हत्याकांड: पांचों दोषियों को उम्रकैद, झूठी कहानी के पीछे छिपी थी खौफनाक साजिश

Pilibhit Anam Murder Case

Pilibhit Anam Murder Case: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में चर्चित अनम हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला महज एक हत्या का नहीं, बल्कि रिश्तों, विश्वास और इंसानियत को झकझोर देने वाली साजिश का था। अभियोजन के अनुसार, एक पड़ोसी को झूठे मुकदमे में फंसाने के इरादे से परिवार के ही लोगों ने 10 वर्षीय अनम की हत्या कर दी थी।

मामले की विवेचना तत्कालीन अमरिया थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश शुक्ला ने की थी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों ने शुरुआती कहानी को पूरी तरह पलट दिया। जिस पड़ोसी पर हत्या का आरोप लगाया गया था, जांच आगे बढ़ने पर वह कहानी झूठी निकली और शक की सुई बच्ची के अपने ही परिजनों की ओर घूम गई।

Pilibhit Anam Murder Case: 2 दिसंबर की शाम घर से निकली थी अनम

घटना पीलीभीत के अमरिया थाना क्षेत्र के माधोपुर गांव की है। 2 दिसंबर 2022 की शाम करीब छह बजे 10 वर्षीय अनम अपने चाचा शादाब और चचेरी बहन के साथ पड़ोसी गांव सरैंदा पट्टी में उर्स मेला देखने गई थी। अगले दिन, 3 दिसंबर की सुबह उसका शव माधोपुर गांव के ही एक गेहूं के खेत में मिला। शव मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। बच्ची के शरीर और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान थे। शुरुआती तौर पर मामला हत्या का माना गया और पुलिस ने जांच शुरू की।

पड़ोसी पर लगाया हत्या का आरोप

बच्ची के पिता अनीस ने पुलिस को बताया कि गांव के ही शकील से उसकी पुरानी रंजिश थी और इसी विवाद के चलते उसने अनम की हत्या की है। पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने शकील के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। हालांकि, जांच के दौरान पुलिस को परिवार की ओर से बताई गई कहानी में कई ऐसे तथ्य मिले, जो आपस में मेल नहीं खा रहे थे। घटनास्थल के साक्ष्य और परिजनों के बयानों में भी विरोधाभास सामने आने लगे। (Pilibhit Anam Murder Case)

जांच ने बदली पूरी कहानी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई स्तरों पर जांच शुरू की। गांव के लोगों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल के दौरान पुलिस को ऐसे सुराग मिले, जिनसे शुरुआती कहानी पर सवाल खड़े हो गए। जांच में सामने आया कि बच्ची के साथ हुई घटना को पड़ोसी के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने पूछताछ और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जब घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ीं तो कथित साजिश का खुलासा हुआ। जांच के अनुसार, अनम की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं की थी। मामले में उसके पिता अनीस समेत परिवार के पांच लोगों की भूमिका सामने आई।

पड़ोसी को फंसाने के लिए रची गई थी साजिश

पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि अनम के पिता का पड़ोसी शकील से विवाद था। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते शकील को हत्या के झूठे मामले में फंसाने की योजना बनाई गई। साजिश के तहत अनम को खेत की ओर ले जाया गया। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान बच्ची पर हमला किया गया और बाद में घटना को इस तरह पेश करने की कोशिश की गई कि हत्या की जिम्मेदारी पड़ोसी पर आए। मामले की जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने परिवार के पांच लोगों को गिरफ्तार किया और उन्हें जेल भेज दिया। (Pilibhit Anam Murder Case)

पुलिस की विवेचना बनी अहम कड़ी

इस मामले में तत्कालीन अमरिया थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश शुक्ला की विवेचना को महत्वपूर्ण माना गया। शुरुआती आरोप के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने घटनास्थल, बयानों और अन्य साक्ष्यों की गहराई से जांच की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, शुरुआती आरोप कमजोर पड़ते गए और परिवार के सदस्यों की भूमिका सामने आती गई। इसी जांच के आधार पर पुलिस ने मामले की वास्तविक तस्वीर अदालत के सामने रखी।

अदालत ने पांचों दोषियों को सुनाई उम्रकैद

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयानों समेत अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे। सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया। न्यायालय ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया। (Pilibhit Anam Murder Case)

अनम हत्याकांड ने खड़े किए गंभीर सवाल

यह फैसला एक बच्ची की हत्या के मामले में न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम होने के साथ-साथ समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी छोड़ता है। आपसी रंजिश और प्रतिशोध की भावना किस हद तक इंसान को संवेदनहीन बना सकती है, यह मामला उसका बेहद दर्दनाक उदाहरण है। 10 साल की अनम अपने ही करीबियों की कथित साजिश का शिकार हुई। अदालत का फैसला कानून की उस भूमिका को भी रेखांकित करता है, जिसमें रिश्ते या सामाजिक प्रभाव नहीं, बल्कि साक्ष्य और कानून अपराध की सच्चाई तय करते हैं।

अनम हत्याकांड की कहानी यह संदेश देती है कि किसी निर्दोष को झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश अंततः खुद अपराधियों के लिए कानूनी शिकंजा बन सकती है। न्यायालय के फैसले के बाद अब इस मामले में दोषियों को मिली सजा उन सभी लोगों के लिए चेतावनी है, जो निजी रंजिश में कानून को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। (Pilibhit Anam Murder Case)

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