Ram Mandir Donations Row: अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर कथित अनियमितताओं पर रिपोर्टिंग करने वाले स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने गाजियाबाद पुलिस की ओर से दर्ज FIR को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इंदिरापुरम थाने में दर्ज इस मामले में कथित रोड-रेज की घटना का हवाला दिया गया है।
उपाध्याय ने अपनी याचिका में पुलिस कार्रवाई को मनगढ़ंत और बदले की कार्रवाई बताया है। उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा के साथ-साथ मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। मामले की तात्कालिकता को देखते हुए CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इसे 25 अगस्त 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
Ram Mandir Donations Row: राम मंदिर चंदे पर पत्रकार की रिपोर्टिंग
अभिषेक उपाध्याय अपने स्वतंत्र डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म “टॉप सीक्रेट” के जरिए उत्तर प्रदेश में कथित प्रशासनिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग करते रहे हैं। जून 2026 में उन्होंने अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान के प्रबंधन में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और धन की हेराफेरी का दावा करते हुए कई रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। इन रिपोर्टों के बाद मामला चर्चा में आया और उत्तर प्रदेश सरकार ने कथित तौर पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
SIT की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर 25 जून 2026 को अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में राम मंदिर ट्रस्ट के एक पदाधिकारी की शिकायत पर आठ नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा, उपाध्याय ने 19 अगस्त 2026 को भदोही में तैनात एक वरिष्ठ IAS अधिकारी से जुड़ी कृषि भूमि खरीद में कथित नियमों की अनदेखी का मामला भी उठाया था। पत्रकार का दावा है कि प्रशासन से जुड़े प्रभावशाली लोगों के खिलाफ उनकी रिपोर्टिंग के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। (Ram Mandir Donations Row)
गाजियाबाद में दर्ज FIR में क्या है आरोप?
मामला गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में दर्ज FIR संख्या 678/2026 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता निक्की गौतम के मुताबिक, 18 अगस्त 2026 को शिप्रा मॉल के पास एक बलेनो कार ने उनकी मोटरसाइकिल को पीछे से टक्कर मारी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कार चालक ने कथित तौर पर जातिसूचक अपशब्द कहे और धमकी दी। शिकायत में वाहन का संबंध अभिषेक उपाध्याय से जोड़ा गया है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अलावा SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आईटी एक्ट की धाराएं भी लगाई हैं।
उपाध्याय ने FIR को बताया ‘प्लांटेड’
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में पत्रकार ने गाजियाबाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कथित रोड-रेज की घटना उनके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता तैयार करने के लिए “प्लांटेड” की गई। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि FIR में दर्ज मोटरसाइकिल नंबर का शिकायतकर्ता से कोई कानूनी संबंध नहीं है और वह कथित घटना से भी मेल नहीं खाता। (Ram Mandir Donations Row)
उपाध्याय के मुताबिक, 20 अगस्त की रात करीब 10:30 बजे और उसके बाद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी उनके गाजियाबाद स्थित घर पहुंचे। उस समय वह घर पर मौजूद नहीं थे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनकी पत्नी और दो बेटियों को पुलिस कार्रवाई के दौरान डराया-धमकाया गया। पत्रकार का यह भी दावा है कि बार-बार मांग करने के बावजूद उन्हें FIR की पूरी प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बजाय कथित तौर पर लखनऊ में दर्ज 2025 के एक पुराने मामले की प्रति दी गई।
याचिका में पुलिस पर घटनास्थल के आसपास के दुकानदारों पर दबाव डालकर CCTV फुटेज हटवाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल याचिका में किए गए दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अदालत में होनी बाकी है। (Ram Mandir Donations Row)
सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी गई?
गिरफ्तारी और कथित पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा की मांग करते हुए उपाध्याय ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
याचिका में मुख्य रूप से तीन राहत मांगी गई हैं:
- इंदिरापुरम थाने में दर्ज FIR को रद्द किया जाए।
- सुनवाई पूरी होने तक उनके खिलाफ किसी भी दंडात्मक या दमनकारी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
- यदि जांच जरूरी मानी जाती है तो इसे उत्तर प्रदेश पुलिस से हटाकर CBI, दिल्ली पुलिस या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाए।
उनके वकील ने अदालत को बताया कि पत्रकार निष्पक्ष और वैध जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें राज्य पुलिस की कथित कार्रवाई से न्यायिक संरक्षण चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए इसे 25 अगस्त 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। (Ram Mandir Donations Row)
प्रेस की स्वतंत्रता पर फिर उठे सवाल
अभिषेक उपाध्याय इससे पहले भी कानूनी विवादों का सामना कर चुके हैं। अक्टूबर 2024 में उत्तर प्रदेश में उनकी एक रिपोर्ट को लेकर FIR दर्ज हुई थी। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। उस समय अदालत ने पत्रकारिता और सरकार की आलोचना के अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाए थे। नए मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या खोजी पत्रकारों के खिलाफ दर्ज सामान्य आपराधिक मामलों का इस्तेमाल उनकी रिपोर्टिंग को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
मामले को लेकर स्वतंत्र पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और नागरिक समाज के कुछ वर्गों ने भी चिंता जताई है। उनका तर्क है कि भ्रष्टाचार और सत्ता से जुड़े संवेदनशील मामलों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को आपराधिक मामलों के जरिए दबाव में लाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। (Ram Mandir Donations Row)
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर रिपोर्टिंग से शुरू हुआ विवाद अब गाजियाबाद की FIR और पत्रकार की सुरक्षा की मांग तक पहुंच गया है। हालांकि, उपाध्याय की ओर से लगाए गए बदले की कार्रवाई, पुलिस उत्पीड़न और FIR को “प्लांटेड” किए जाने जैसे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और जांच के बाद ही निकलेगा। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण होगी कि अदालत इस मामले में पत्रकार की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी मांगों पर क्या रुख अपनाती है।











