देश की संसद में मानसून सत्र के दौरान लगातार भारी हंगामा देखने को मिल रहा है। Parliament Anti Paper Leak Bill Debate के बीच 28 जुलाई 2026 को दो दिनों तक चली तीखी बहस के बाद लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 (एंटी पेपर लीक बिल) को वॉइस वोट से पास कर दिया गया। हालांकि, बिल पास होने की प्रक्रिया के दौरान सदन के भीतर पक्ष और विपक्ष के बीच जबर्दस्त तीखी नोकझोंक हुई, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
संसद के भीतर असली विवाद तब भड़का जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। इसके साथ ही, राहुल गांधी के बयानों, केंद्रीय मंत्रियों के जवाबों, विपक्षी सांसदों के सवालों और राम मंदिर ट्रस्ट के ऑडिट की मांगों ने संसद के माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि संसद के अंदर पिछले दो-तीन दिनों में क्या-क्या हुआ और यह पूरा मामला किस दिशा में बढ़ रहा है।
राहुल गांधी का गृह मंत्री पर गंभीर आरोप और सदन में ‘अंधभक्त’ शब्द पर हंगामा
लोकसभा में अपनी बात रखते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गृह मंत्री के आदेश पर पुलिस कार्रवाई की गई। राहुल गांधी ने सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि या तो गृह मंत्री ने आदेश दिया था या उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी; दोनों ही स्थितियों में यह सरकार की नाकामी को दर्शाता है।
इसके अलावा, राहुल गांधी द्वारा अपने भाषण के दौरान “अंधभक्त” शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और सत्तापक्ष के अन्य सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई। रिजिजू ने इसे असंसदीय भाषा करार दिया। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि शिक्षा मंत्रालय को अप्रत्यक्ष रूप से आरएसएस द्वारा संचालित किया जा रहा है और विश्वविद्यालयों में विचारधारा विशेष के लोगों को नियुक्त किया जा रहा है।Parliament Anti Paper Leak Bill Debate
सरकार का स्पष्टीकरण: ‘गोली चलाने का आदेश मजिस्ट्रेट देता है, मंत्री नहीं’
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा किसी भी भीड़ को नियंत्रित करने या बल प्रयोग करने का आदेश कानूनन मजिस्ट्रेट द्वारा दिया जाता है, किसी मंत्री द्वारा नहीं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों पर कोई गोली नहीं चलाई गई थी, बल्कि स्थिति को संभालने के लिए केवल अश्रु गैस (टियर गैस) के गोले छोड़े गए थे।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि नया एंटी पेपर लीक बिल देश के इतिहास में एक ऐतिहासिक कदम है। इस नए कानून के लागू होने के बाद किसी भी पेपर लीक मामले की जांच 2 महीने के भीतर और न्यायिक ट्रायल 3 महीने के भीतर पूरा करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2009, 2011 और 2013 में भी पेपर लीक की घटनाएं हुई थीं, लेकिन उस समय कड़े कानून नहीं बनाए गए थे।
Parliament Anti Paper Leak Bill Debate: विपक्ष के तीखे सवाल और सुसाइड का मुद्दा
विपक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज और टियर गैस का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि घायल छात्रों को विपक्ष के नेताओं से मिलने से रोकने के लिए जल्दबाजी में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अस्पताल में घायल छात्रों और उनके परिजनों से मुलाकात का जिक्र करते हुए सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए। वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2024 में कानून बनने के बावजूद पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं और हाल के दिनों में कई छात्रों ने मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठाया। एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने इस मामले में निष्पक्ष एसआईटी (SIT) जांच की मांग की।Parliament Anti Paper Leak Bill Debate

सत्तापक्ष का पलटवार: ‘गड़बड़ी की सूचना मिलते ही 3 दिन में दोबारा परीक्षा का फैसला’
भाजपा सांसदों ने सरकार के कदमों का बचाव करते हुए विपक्ष के दावों को खारिज किया। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और यह किसी अपराध से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि गड़बड़ी की खबर मिलते ही सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 3 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया था।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि 40 हजार से अधिक परीक्षा केंद्रों पर 45 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराया गया और मामले में शामिल 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून देश की परीक्षा प्रणाली में छात्रों के विश्वास को बहाल करने का काम करेगा।Parliament Anti Paper Leak Bill Debate
राम मंदिर ट्रस्ट के ऑडिट की मांग और पंजाब सरकार पर विरोध
संसद में केवल पेपर लीक का मुद्दा ही नहीं छाया रहा, बल्कि अन्य विषय भी गूंजते रहे। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने राज्यसभा में नोटिस देकर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों का स्वतंत्र और पूर्ण ऑडिट कराने की मांग की। समाजवादी पार्टी के सांसदों ने भी संसद परिसर में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
दूसरी तरफ, पंजाब में कथित पेपर लीक के आरोपों को लेकर भी संसद भवन के बाहर और भीतर घमासान देखने को मिला। कांग्रेस सांसदों ने पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की, तो वहीं एनडीए के सांसदों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इससे यह साफ हो गया कि पेपर लीक का मुद्दा अब केंद्र तक सीमित न रहकर राज्य सरकारों की राजनीति से भी जुड़ गया है।
29 जुलाई की कार्यवाही: बार-बार स्थगन और राज्यसभा पर टिकी नजरें
29 जुलाई की सुबह 11 बजे जैसे ही संसद की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद दोपहर में जब दोबारा सदन शुरू हुआ, तो राहुल गांधी ने अपना भाषण जारी रखा और छात्रों के आंदोलन को जायज ठहराया।
बार-बार के हंगामे और कार्यस्थगन के बीच यह स्पष्ट है कि भले ही एंटी पेपर लीक बिल लोकसभा से पास हो चुका हो, लेकिन असली परीक्षा अब राज्यसभा में होनी है। राज्यसभा में बिल पेश होने के दौरान भी तीखी बहस और हंगामे की पूरी संभावना जताई जा रही है।
कानून के साथ-साथ जवाबदेही और भरोसे की जंग
संक्षेप में कहें तो Parliament Anti Paper Leak Bill Debate ने देश के राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार जहां इस विधेयक को युवाओं के हित में उठाया गया क्रांतिकारी और कड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे नाकामी छिपाने का जरिया मान रहा है।
संसद के भीतर चल रही यह लड़ाई अब महज एक कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य, प्रशासनिक जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की लड़ाई बन चुकी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यसभा में इस बिल का सफर कैसा रहता है और सरकार विपक्ष के सवालों पर क्या रुख अपनाती है।











