Assam Flood 2026: पानी जिंदगी देता है लेकिन जब वही पानी बाढ़ बनकर आता है तो अपने साथ तबाही भी लेकर आता है। घर डूब जाते हैं, खेत बर्बाद हो जाते हैं और लोगों की जिंदगी ठहर जाती है। इन दिनों असम के हजारों परिवार इसी दर्द से गुजर रहे हैं। पानी भले ही धीरे धीरे उतर रहा हो लेकिन मुश्किलें अभी भी कम नहीं हुई हैं। लोग अभी भी राहत शिविरों में हैं। गांव का संपर्क टूटा हुआ है और हर किसी के मन में एक ही सवाल है जिंदगी फिर से पटरी पर कब लौटेगी?
Assam Flood 2026: असम में बाढ़ का कहर, 5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
असम में बाढ़ के हालात 26 जुलाई को पहले के मुकाबले बेहतर जरूर हुए हैं लेकिन परेशानी अभी भी बढ़ी है। असम स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ASDMA) के मुताबिक, चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और शिवसागर जिलों में बाढ़ से 5 लाख 24 हजार 700 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। शनिवार 25 जुलाई तक छह जिलों में करीब 655000 लोग बाढ़ की चपेट में थे। यानी हालात में कुछ सुधार जरूर हुआ है लेकिन बड़ी आबादी अभी भी राहत का इंतजार कर रही है।

डूबने से दो और मौतें, मृतकों का आंकड़ा 68 पहुंचा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाढ़ की वजह से दो और मौतें हुई हैं। दोनों लोगों की मौत डूबने से हुई है। यह घटनाएं चराईदेव जिले में हुई। इसके साथ ही इस साल असम में बाढ़ से 68 लोगों की जान चली गई है। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर चराईदेव जिले पर पड़ा है, जहां करीब 1,90,000 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद शिवसागर में 1.5 लाख से ज्यादा और जोरहाट में करीब 1,400 लोग बाढ़ से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, गोलाघाट और नगांव जिले भी प्रभावित हुए हैं। (Assam Flood 2026)
राहत शिविरों में हजारों विस्थापित, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने चार जिलों 354 रिलीफ कैंप यानी कि राहत शिविर और सहायता वितरण केंद्र चलाए हैं। इन शिविरों में 37,724 विस्थापित लोगों ने पनाह ली है। रेस्क्यू ऑपरेशन भी लगातार जारी है। सेना NDRF, SDRF फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और पुलिस की टीमें अपर असम के अलग-अलग इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकाल रही हैं।

CM हेमंता बिस्वा शर्मा बोले- तेजी से बहाल हो रही हैं जरूरी सेवाएं
इसी बीच, 26 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा शर्मा ने बिजली बहाली और राहत कार्यों को लेकर सोशल मीडिया एक्स पर अपडेट दिया है। उन्होंने लिखा है कि असम में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा है और हालात सामान्य हो रहे हैं। बाढ़ के दौरान एहतियात ते तौर पर जिन इलाकों में बिजली आपूर्ति बंद की गई थी, वहां अब चरणबद्ध तरीके से बिजली बहाल की जा रही है। हमारी टीमें शिवसागर, जोरहाट, चराईदेव धुबरी, बोंगाईगांव और दूसरे प्रभावित इलाकों में सुरक्षा जांच के बाद बिजली सप्लाई बहाल कर रही हैं। हम जल्द से जल्द जरूरी सेवाएं बहाल करने और हर प्रभावित इलाके को सामान्य स्थिति में लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। (Assam Flood 2026)
सैकड़ों गांव अब भी जलमग्न, फसल और पशुधन को भारी नुकसान
ASDMA के मुताबिक, इस समय राज्य के 763 गांव अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। बाढ़ की वजह से 48742.09 हेक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी हैं। कई जगहों पर तटबंध सड़कें, पुल और दूसरे बुनियादी ढाचों को भी नुकसान पहुंचा है। धनशरी नदी न्यूमालीगढ़ में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यही वजह है कि प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। बाढ़ का असर सिर्फ लोगों तक सीमित नहीं है। ASDMA के मुताबिक, राज्य में 88240 पालतू जानवर और पोल्ट्री भी इस आपदा में प्रभावित हुए हैं। बीते साल भी असम में ऐसे ही हालात थे।
आखिर असम में हर साल क्यों आती है बाढ़?
अब सवाल यह है कि असम में हर साल बाढ़ क्यों आती है? असम में आई बाढ़ की कहानी के केंद्र में ब्रह्मपुत्र नदी है , जो दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली नदियों में से एक है। तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो के रूप में उत्पन्न होने वाली यह नदी पूर्व की ओर बहती है और नामचा बरवा के पास हिमालय के चारों ओर एक यू-टर्न लेती है। (Assam Flood 2026)
इसके बाद यह अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी के रूप में प्रवेश करती है, पर्वतीय धाराओं से भारी मात्रा में पानी एकत्रित करती है, और अंत में असम में प्रवेश करते ही ब्रह्मपुत्र बन जाती है। जब तक यह नदी असम घाटी तक पहुंचती है, तब तक यह पूर्वी हिमालय में ग्लेशियरों, बर्फ पिघलने और भारी वर्षा से पानी एकत्र कर चुकी होती है, जिससे इसकी मात्रा में तेजी से वृद्धि होती है।
पहाड़, मानसून और सहायक नदियां कैसे बढ़ाती हैं बाढ़ का खतरा
असम एक संकरी घाटी में स्थित है जो खड़ी पर्वत श्रृंखलाओं से घिरी हुई है, उत्तर में पूर्वी हिमालय, पूर्व और दक्षिण-पूर्व में पटकाई पहाड़ियाँ और नागा पहाड़ियाँ और दक्षिण में मेघालय पठार। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान, बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरी हवाएँ इन पहाड़ों के ऊपर उठने के लिए मजबूर होती हैं। हवा के ठंडा होने पर, यह भारी मात्रा में बारिश छोड़ती है, जिसे पर्वतीय वर्षा के रूप में जाना जाता है।
इस पानी का अधिकांश भाग सुबनसिरी, मानस, जिया भराली, धनसिरी और कोपिली सहित सैकड़ों सहायक नदियों के माध्यम से ढलान से नीचे की ओर बहता है, और अंत में ब्रह्मपुत्र में मिल जाता है। इसके चलते मानसून के दौरान नदी प्रणाली में तेजी से जलस्तर बढ़ जाता है। (Assam Flood 2026)
गाद और बदलता नदी मार्ग, क्यों नहीं थमती ब्रह्मपुत्र की तबाही
ब्रह्मपुत्र नदी भारत की अधिकांश नदियों से अलग है क्योंकि यह दुनिया में सबसे अधिक गाद ले जाने वाली नदियों में से एक है। हिमालय के युवा पर्वत लगातार अपरदन का शिकार हो रहे हैं, जिसके चलते भूस्खलन से चट्टानें, रेत और गाद नदी में बहकर आ रही हैं।
जैसे-जैसे यह गाद असम के मैदानी इलाकों में जमा होती जाती है, नदी का तल धीरे-धीरे ऊपर उठता जाता है, जिससे बाढ़ के पानी को ले जाने की उसकी क्षमता कम हो जाती है। ब्रह्मपुत्र एक बहुस्तरीय नदी है, जो लगातार अपने मार्ग बदलती रहती है और रेत के टीले बनाती है जिन्हें चर कहा जाता है। इन बदलते मार्गों के कारण तटबंधों का रखरखाव मुश्किल हो जाता है और तेज़ बहाव के दौरान उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। (Assam Flood 2026)
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई बाढ़ की चुनौती
जब हर जगह एक साथ बारिश होती है बाढ़ की स्थिति और भी बदतर हो जाती है क्योंकि बारिश केवल असम में ही नहीं होती है। तिब्बत, अरुणाचल प्रदेश, भूटान और उत्तरपूर्वी भारत में एक साथ भारी मानसूनी बारिश होती है, जिससे भारी मात्रा में पानी निचले इलाकों में बह जाता है। जब कई सहायक नदियों से आने वाली बाढ़ की ये चोटियाँ एक साथ पहुँचती हैं, तो ब्रह्मपुत्र घाटी के विशाल क्षेत्रों में उफान मार सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पूर्वी हिमालय में अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की तीव्रता बढ़ रही है। कम समय तक चलने वाले बादल फटने, हिमनदों के पिघलने और अधिक बार तीव्र मानसून की वजह से नदियों में जल प्रवाह बढ़ रहा है। (Assam Flood 2026)
क्या असम में बाढ़ को रोका जा सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि असम में बाढ़ को खत्म नहीं किया जा सकता क्योंकि यह ब्रह्मपुत्र के प्राकृतिक चक्र का हिस्सा है। दरअसल, मौसमी बाढ़ उपजाऊ मिट्टी को फिर से भर देती है, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जैसे आर्द्रभूमि को बनाए रखती है और कृषि और मत्स्य पालन का समर्थन करती है।
चुनौती यह है कि बेहतर बाढ़ पूर्वानुमान के माध्यम से उनके विनाशकारी प्रभाव को कम किया जाए, प्राकृतिक स्पंज के रूप में कार्य करने वाली आर्द्रभूमि को बहाल किया जाए, जहां उपयुक्त हो वहां तटबंधों को मजबूत किया जाए, जल निकासी में सुधार किया जाए और बाढ़ के मैदानों पर निर्माण से बचा जाए। (Assam Flood 2026)
असम के लिए बाढ़ महज एक मौसमी घटना नहीं है, बल्कि यह एक अनूठी भौगोलिक स्थिति और कई देशों को पार करने वाली नदी के संगम का परिणाम है। यह राज्य दुनिया की सबसे शक्तिशाली नदियों में से एक, कुछ सबसे नम पर्वतों और पृथ्वी पर सबसे तीव्र मानसून प्रणालियों में से एक के संगम पर स्थित है, जिसके कारण वार्षिक बाढ़ यहाँ के जीवन का लगभग अपरिहार्य हिस्सा बन जाती है।











