Nepal Flood: नेपाल के मध्य पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल में इस आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 हो गई है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) की ओर से शनिवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मलबे और कीचड़ से लगातार शव बरामद होने के कारण मृतकों की संख्या में इजाफा हुआ है।
वहीं, चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से मरने वालों की कुल संख्या 682 पहुंच गई है। हादसे के बाद अब भी 2,426 लोग लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
Nepal Flood: ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही
रिपोर्ट के मुताबिक, यह भीषण प्राकृतिक आपदा बुधवार को नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बती क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और हिमस्खलन के बाद शुरू हुई। इसके चलते ऊपरी ल्हेंदे नदी के साथ-साथ भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र में पानी का स्तर अचानक बढ़ गया। तेज रफ्तार से आई पानी की लहरें अपने साथ भारी मात्रा में मलबा, बड़ी चट्टानें और कीचड़ बहाकर ले आईं। इस मलबे ने रास्ते में आने वाले कई गांवों, बाजारों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया। कई इलाकों में घर और अन्य इमारतें देखते ही देखते तबाह हो गईं।
हजारों लोग लापता, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट सबसे ज्यादा प्रभावित
इस आपदा का सबसे ज्यादा असर नदी किनारे स्थित परियोजनाओं और पर्यटन क्षेत्रों में मौजूद लोगों पर पड़ा है। कुल 2,426 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ की तेज धार ने कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी अपनी चपेट में ले लिया। विभिन्न हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले 933 मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा हिमालयी क्षेत्र में ट्रैकिंग, पर्यटन और धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए पहुंचे 517 विदेशी नागरिकों का भी कोई पता नहीं चल पाया है। (Nepal Flood)
लापता लोगों में सुरक्षा और प्रशासनिक विभागों के कर्मचारी भी शामिल हैं। नेपाल सेना के 45 जवान, 40 पुलिस अधिकारी तथा 19 आव्रजन और सीमा शुल्क अधिकारी भी इस आपदा के बाद लापता बताए गए हैं।
इन जिलों में सबसे ज्यादा तबाही
नेपाल पुलिस के अनुसार, देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। चितवन, नवलपरासी, गोरखा, नुवाकोट, रसुवा और धादिंग जिलों में नदियों और मलबे से बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। त्रिशूली नदी के किनारे बसे कई बाजार और रिहायशी इलाकों में भारी तबाही हुई है। कई इमारतें पूरी तरह ढह गईं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के सामने घर और जरूरी सामान गंवाने का संकट खड़ा हो गया है। रेड क्रॉस के शुरुआती आकलन के मुताबिक, इस आपदा से करीब 93,000 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। (Nepal Flood)
14,800 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी रेस्क्यू में जुटे
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान बड़े स्तर पर जारी है। नेपाल सरकार ने मलबे में फंसे लोगों को तलाशने और शवों को निकालने के लिए 14,800 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। हेलीकॉप्टरों की मदद से अब तक 3,700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा भारत की एक विशेष तकनीकी और विशेषज्ञ टीम भी नेपाल पहुंच गई है। यह टीम जलविद्युत परियोजनाओं की बंद या मलबे से भरी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश के लिए आधुनिक उपकरणों के जरिए अभियान चला रही है। चीन के सुरंग विशेषज्ञ भी नेपाल के तकनीकी दल के साथ मिलकर टनल रेस्क्यू ऑपरेशन में सहयोग कर रहे हैं।
बैरियर लेक से बढ़ा एक और खतरा
राहत और बचाव अभियान के बीच रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के उद्गम क्षेत्र के पास एक नई अस्थायी झील बनने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। मलबा जमा होने के कारण बनी इस बैरियर लेक के कभी भी टूटने की आशंका जताई गई है। चीनी अधिकारियों ने संभावित खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है। अगर यह अस्थायी झील टूटती है, तो निचले इलाकों में एक बार फिर अचानक और तेज बाढ़ आ सकती है। इसी आशंका को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने की सलाह दी है। (Nepal Flood)
नेपाल सरकार के सामने अब राहत और बचाव के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती भी है। सरकार ने तबाही से उबरने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से करीब 3 से 4 अरब यूरो की वित्तीय सहायता की अपील की है।











