Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुकी है। विशेष जांच दल यानी एसआईटी अब केवल कागजी रिकॉर्ड्स और पुराने दस्तावेजों पर भरोसा नहीं कर रही है, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े तीस बैंक लॉकर्स में रखे सामान की भौतिक और फॉरेंसिक जांच कर रही है। जांच टीम का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि ट्रस्ट के रजिस्टरों में जो दान दर्ज किया गया है, वह हकीकत में लॉकर्स के अंदर मौजूद है या नहीं। लॉकर्स को खोलने से लेकर सामान की गिनती, उसकी पहचान और मौजूदा स्थिति की पूरी प्रक्रिया की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जा रही है। इन सभी डिजिटल सबूतों और पेन ड्राइव डेटा को आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया जा सकता है। जांच टीम सितंबर के पहले हफ्ते में अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत को सौंपने की तैयारी में है।

Ram Mandir Donation Scam: इसी बीच दो सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक बड़ी और अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक से ठीक पहले पूर्व महासचिव चंपत राय का नाम एक बार फिर अचानक सुर्खियों में आ गया है। जून दो हजार छब्बीस में अपने पद से त्यागपत्र देने वाले चंपत राय हाल के दिनों में अयोध्या में काफी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वे लगातार विभिन्न मठ-मंदिरों के आयोजनों, संतों के कार्यक्रमों और धार्मिक समारोहों में हिस्सा ले रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि उन्हें फिर से ट्रस्ट में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। उनके समर्थकों का तर्क है कि एसआईटी की शुरुआती जांच में उनके खिलाफ चढ़ावा चोरी में कोई सीधा सबूत या सीधी संलिप्तता नहीं मिली है, इसलिए उन्हें दोबारा मौका मिलना चाहिए।
दूसरी तरफ, चंपत राय की संभावित वापसी का ट्रस्ट के अंदर ही विरोध भी शुरू हो गया है। ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने इस मामले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और कार्यकारिणी के सदस्यों को पत्र भेजकर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। महिपाल सिंह का आरोप है कि मंदिर में दान की गिनती के दौरान नियमों की अनदेखी की गई और कैश तथा कीमती सामान के प्रबंधन में कई तरह की गड़बड़ियां हुईं। उन्होंने मंदिर निर्माण की शुरुआती अनुमानित लागत आठ सौ करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग बाईस सौ करोड़ रुपये होने पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन सभी दावों और व्यक्तिगत आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और अंतिम सच्चाई एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
Ram Mandir Donation Scam: इस पूरे घटनाक्रम के बीच मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को लेकर भी नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आगामी बैठक में मंदिर के स्थायी सीईओ यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर फैसला हो सकता है। खबर है कि इस पद के लिए किसी पूर्व वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के नाम पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज में प्रशासनिक अधिकारियों का दखल बढ़ सकता है, जिसे कई लोग पुराने विश्व हिंदू परिषद से जुड़े चेहरों और नए प्रशासनिक सेटअप के बीच के बदलाव के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल, सभी की नजरें दो सितंबर की ट्रस्ट बैठक और एसआईटी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाने वाली अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।









