Nepal Floods: नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल के रसुवा जिले में चीन (तिब्बत) सीमा के पास आई इस बाढ़ से सड़कें, पुल, जलविद्युत परियोजनाएं और बिजली से जुड़ा बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हादसे में अब तक 175 शव बरामद होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 28 देशों के करीब 476 लोगों के लापता होने की सूचना है।
नेपाल में आई इस आपदा का असर अब डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है। भोटेकोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली के जरिए संभावित जलप्रवाह को देखते हुए भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सीमावर्ती जिलों में 24 घंटे निगरानी के साथ हाई अलर्ट जारी किया है।
Nepal Floods: बादल फटने के बाद भोटेकोशी नदी में आया उफान, तबाह हुआ बुनियादी ढांचा
यह आपदा 26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने और बादल फटने के बाद शुरू हुई। रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धाडिंग समेत नेपाल के कई जिलों में बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया है। सड़कों के साथ 19 महत्वपूर्ण पुलों और कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।
नेपाल और चीन को जोड़ने वाला ऐतिहासिक फ्रेंडशिप ब्रिज भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गया। आपदा के दौरान इलाके में बड़ी संख्या में विदेशी और भारतीय पर्यटक मौजूद थे। लापता लोगों में 100 से अधिक भारतीय नागरिकों के शामिल होने की जानकारी है। इनमें कई तीर्थयात्री और पर्यटक बताए जा रहे हैं, जो तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे।
उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट, सीमावर्ती जिलों में 24 घंटे निगरानी
भोटेकोशी नदी आगे चलकर त्रिशूली नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है। भारत में प्रवेश करने के बाद यही नदी प्रणाली गंडक और नारायणी के नाम से जानी जाती है। संभावित जलस्तर बढ़ोतरी को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीमावर्ती जिलों के प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
यूपी राहत आयुक्त कार्यालय ने लखनऊ में एक विशेष निगरानी टीम तैनात की है, जो नेपाल में बाढ़ की स्थिति और उससे जुड़े संभावित प्रभावों पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है। महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया और गोरखपुर समेत सीमावर्ती जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन गंडक और नारायणी नदियों के जलस्तर के साथ-साथ वाल्मीकि नगर बैराज की स्थिति पर भी लगातार निगरानी कर रहा है।
राहत और बचाव की तैयारियों के तहत NDRF, SDRF और SSB की कुल 18 टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा नेपाल में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए उत्तर प्रदेश की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1070 पर विशेष टीम भी सक्रिय की गई है।
हेल्पलाइन 1070 पर 10 कॉल, यूपी में फिलहाल तत्काल बाढ़ का खतरा नहीं
यूपी के राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद के अनुसार, हेल्पलाइन 1070 पर अब तक 10 कॉल प्राप्त हो चुकी हैं। इन कॉल के जरिए लोगों ने नेपाल यात्रा पर गए अपने परिजनों से संपर्क टूटने की जानकारी दी है।
यशोद ने कहा कि फिलहाल उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में बाढ़ का कोई तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि नेपाल की उत्तरी सीमा पर हुई इस घटना के बाद डाउनस्ट्रीम में बाढ़ के पानी के संभावित प्रभाव को लेकर निगरानी बढ़ाई गई थी। हालांकि, रातभर की निगरानी में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर नहीं गया। उन्होंने कहा कि नेपाल में बचाव अभियान जारी है और भारत सरकार भी राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग कर रही है।
वाल्मीकि बैराज से करीब 1 लाख क्यूसेक पानी का बहाव
राहत आयुक्त ने बताया कि जुलाई में कुशीनगर, महाराजगंज और देवरिया जिलों में करीब 2 लाख क्यूसेक पानी के प्रवाह को संभाला गया था और उस दौरान भी गंभीर बाढ़ की स्थिति नहीं बनी थी। फिलहाल वाल्मीकि बैराज से करीब 1 लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। प्रशासन के मुताबिक, वर्तमान स्थिति में इससे कोई तत्काल खतरा नहीं है। हालांकि, नदी के जलस्तर में किसी भी संभावित वृद्धि को देखते हुए निगरानी जारी है।
गंडक-नारायणी के जलस्तर पर लगातार नजर
नेपाल में आई त्रासदी के मद्देनजर उत्तर प्रदेश प्रशासन खासतौर पर महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक तथा नारायणी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहा है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल निवारक कदम उठाने के लिए स्थानीय प्रशासन को तैयार रखा गया है। यशोद ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में रातभर बांधों और जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी की गई। नेपाल की ओर स्थित बांधों और तटबंधों से जुड़ी जानकारी भी लगातार जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल बाढ़ का कोई तत्काल खतरा नहीं है। अगर नेपाल से बाढ़ का पानी आता भी है, तो उससे निपटने के लिए सभी संबंधित जिलों में प्रशासनिक तैयारियां पूरी हैं।
नेपाल में 175 मौतें, 476 लोग लापता होने की सूचना
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से अब तक बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। नेपाल दूतावास के सूत्रों के अनुसार, 175 शव बरामद किए जा चुके हैं। वहीं, स्थानीय लोगों और विदेशी पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। करीब 28 देशों के 476 लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है। हालांकि, राहत और बचाव अभियान जारी होने के कारण इन आंकड़ों की अभी पुष्टि की जा रही है। बाढ़ से घरों, सड़कों, पुलों और बिजली सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है।











