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राजस्थान में प्रसव के बाद 18 महिलाओं की मौत, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल; सरकार ने विशेषज्ञों को सौंपी जांच

Rajasthan

Rajasthan: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में मई 2026 से अब तक प्रसव के बाद 18 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिसके बाद राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस बेहद संवेदनशील मामले पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा है कि मौतों का यह पैटर्न हैरान करने वाला है और मौत का सटीक कारण अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन कर व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।

Rajasthan: भीलवाड़ा, कोटा और बीकानेर के मामलों ने बढ़ाई चिंता

हाल के मामलों में, 5 से 10 जुलाई के बीच भीलवाड़ा और बांसवाड़ा इन दोनों जिलों में ही 9 महिलाओं की मौत हुई है। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल से जुड़े मैटरनिटी विंग में ही 6 दिनों के भीतर 5 महिलाओं ने दम तोड़ दिया, जिनकी सिजेरियन (C-section) डिलीवरी हुई थी। अस्पताल के रिकॉर्ड से पता चलता है कि सभी पांच महिलाओं को सर्जरी के बाद जटिलताएं हुईं और उन्हें गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

मई के महीने में कोटा के सरकारी अस्पताल में डिलीवरी के बाद 5 महिलाओं की मौत हुई थी। जून में बीकानेर में छह महिलाओं को सिजेरियन ऑपरेशन के बाद किडनी फेलियर हो गया, जिनमें से दो की बाद में मौत हो गई। इन मामलों से जुड़ी सात महिलाएं अभी भी डायलिसिस पर हैं। जैसे-जैसे चिंताएं बढ़ती गईं, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खिमसर ने कहा कि मौतों के पैटर्न ने अधिकारियों को चौंका दिया है और कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों को बुलाया गया है। (Rajasthan)

स्वास्थ्य मंत्री बोले- मौतों का पैटर्न चौंकाने वाला, जांच के बाद ही सामने आएगी असली वजह

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि शुरुआत में गर्मियों के कारण ‘डिहाइड्रेशन’ (पानी की कमी) को वजह माना जा रहा था, लेकिन मानसून आने के बाद भी मौतें होने से यह थ्योरी कमजोर हो गई है और अब सही कारण जांच के बाद ही पता चलेगा। मंत्री ने किसी भी तरह की तत्काल मेडिकल लापरवाही से इनकार किया है। उनका तर्क है कि निजी अस्पतालों से आखिरी समय में बेहद गंभीर हालत में मरीजों को सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाता है, जिससे मौत के आंकड़े बढ़े हैं।

परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, मंत्री के बयान पर विपक्ष ने घेरा सरकार

सरकार ने प्रभावित अस्पतालों के मेडिकल रिकॉर्ड, इलाज की प्रक्रियाओं और दवाओं व उपकरणों का विस्तृत ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, पीड़ितों के परिवारों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनके परिजनों ने जवाब और न्याय की मांग करते हुए अस्पतालों के अंदर विरोध प्रदर्शन किया। इस गंभीर मुद्दे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वास्थ्य मंत्री का मुस्कुराते हुए “मिलते हैं ब्रेक के बाद” कहना सोशल मीडिया पर भारी विवाद का कारण बन गया है और विपक्ष इसे सरकार की संवेदनहीनता बता रहा है। (Rajasthan)

ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन से लेकर उपकरणों की कमी तक, हर पहलू जांच के दायरे में

जानकारी के मुताबिक, कोटा में हुई मौतों के बाद ड्रग कंट्रोल विभाग की जांच में डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल होने वाले एक प्रमुख इंजेक्शन (ऑक्सीटॉसिन) का सैंपल फेल पाया गया था, जिसके बाद संबंधित कंपनी का लाइसेंस भी रद्द किया गया है। भीलवाड़ा अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, वहां प्रतिदिन 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन होते हैं, लेकिन सर्जिकल उपकरणों के केवल 8 सेट उपलब्ध हैं। प्रत्येक सेट को स्टरलाइज (संक्रमण मुक्त) करने में 3 घंटे लगते हैं, जिससे अत्यधिक वर्कलोड के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

भीलवाड़ा के जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने अस्पताल का निरीक्षण किया और मामलों से संबंधित रिपोर्टों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अभी तक मौतों को संक्रमण से जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की मौत विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुई है और सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं। (Rajasthan)

कांग्रेस का सरकार पर हमला, मातृ मृत्यु के बढ़ते मामलों को बताया स्वास्थ्य व्यवस्था की नाकामी

इसी बीच, कांग्रेस ने भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार को निशाना बनाते हुए इन मौतों को भयानक और चौंकाने वाला बताया और कहा कि ये राजस्थान की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में गहरा होते संकट को दर्शाती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, “राज्य में मातृ मृत्यु दर में हो रही वृद्धि बेहद भयावह और चौंकाने वाली है, और यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में बढ़ते संकट को दर्शाती है। बांसवाड़ा में चार मौतों के बाद अब दो महीनों में 18 मौतों की खबरें सामने आई हैं। सरकार की जवाबदेही की कमी स्थिति को और भी गंभीर बना रही है।”

उन्होंने प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार संकट से निपटने में असमर्थ रही है और आगे होने वाली मौतों को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

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