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इजराइल पर कितना बड़ा आर्थिक संकट ?

गेीोात

 

हमास और इजरायल के युद्ध के बीच रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इजरायली पीएम को फोन किया। पुतिन ने नेतन्याहू को आश्वासन दिया है कि वह इस संकट की घड़ी में उनके साथ हैं और इसे खत्म करने के लिए हर संभव मदद देने को भी तैयार हैं। नेतन्याहू से बातचीत से पहले पुतिन ने ईरान, मिस्र, सीरिया और फिलिस्तीनी नेताओं से बातचीत की थी।

हमास के हमले के बाद इस्राइल लगातार गाजा पट्टी पर हमला कर रहा है। इस्राइल ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध हमास ने शुरू किया है पर खत्म वो करेगा। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि जंग लंबे समय तक जारी रह सकता है।  जिसका असर इस्राइल की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

 हमास-इस्राइल के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद लगातार अर्थशास्त्री आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि लड़ाई इस्राइल के अर्थतंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी। इस्राइल में लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने से यहां पर्यटन और निर्यात क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। कई प्रमुख रोजगार क्षेत्र युद्ध के दौरान निर्बाध रूप से जारी रहेंगें। पर, उसके बावजूद भी युद्ध के परिणाम भयंकर ही होते हैं। जिसका असर परोक्ष अथवा अपरोक्ष रुप से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता ही है।

इसमें इस्राइल का रासायनिक क्षेत्र भी शामिल है, जो निर्यात का एक प्रमुख स्रोत है। मृत सागर क्षेत्र खनिजों से समृद्ध है। गाज़ा पट्टी से उत्तर में मौजूद अशदोद बंदरगाह पोटाश निर्यात का एक प्रमुख केंद्र है। वहीं इस सप्ताह अब तक मुख्य इस्राइली स्टॉक इंडेक्स 6 फीसदी गिर चुका है।

जैसा कि इस्राइल ने गाजा में हमास के खिलाफ अभियान शुरू किया है जिसके लिए उसे सैनिकों की तैनाती और आवाजाही करानी होगी। हमास के आतंकवादी हमले का जवाब देने के लिए इस्राइल के रक्षा बलों ने तीन लाख से अधिक आरक्षित सैनिकों को ड्यूटी पर बुलाया। इस्राइल की थल सेना, वायु सेना और नौसेना में 1,50,000 सदस्य शामिल हैं। वहीं, रिजर्व फोर्स में लगभग 4,50,000 सदस्य हैं। सैन्य अभियान के लिए अब अधिक सरकारी खर्च की आवश्यकता होगी। वहीं खर्च बढ़ने का अर्थ यह हो सकता है कि उच्च ब्याज दर वाले माहौल में अतिरिक्त धन उधार लेना होगा और कर बढ़ाए जा सकते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।

सात अक्तूबर को हमले के बाद इस्राइल ने युद्ध की स्थिति घोषित कर दी गई। उधर संघर्ष शुरू होते ही लोकल स्टॉक और बांड गिर गए। फिलहाल देश में कई व्यवसाय और स्कूल बंद हैं, जबकि एयरलाइंस ने राजधानी तेल अवीव के लिए अधिकांश उड़ानें बंद कर दी हैं। केंद्रीय बैंक ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह इस्रायली मुद्रा शेकेल को गिरने से रोकने के लिए 30 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा बेचेगा। इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि विश्व अर्थव्यवस्था को इस्राइल-हमास आतंकवादियों के बीच युद्ध से नई अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। संघर्ष से तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है।आईएमएफ के अनुसार, 2024 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि इस साल अनुमानित 3% से धीमी होकर 2.9% हो जाएगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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