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Lok Sabha Election: योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर का जानें दिलचस्प इतिहास

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Lok Sabha Election 2024: देश की राजनीति में गोरखपुर लोकसभा सीट काफी अहम है। जब से सीएम योगी ने इस जिले की कमान संभाली है तब से यहां बीजेपी का कमल खिला हुआ है। अगर इस सीट के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो साल 1951-52 में देश के पहले लोकसभा चुनाव में इस सीट का कोई अस्तित्व नहीं था। लेकिन जब 1957 में दूसरी बार आम चुनाव हुए तब गोरखपुर लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। पहले ही चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। पार्टी के दो उम्मीदवार सिंहासन सिंह और महादेव प्रसाद को सफलता मिली। खास बात ये थी कि 1952 से 1957 में कुछ लोकसभा सीटों पर दो-दो सांसद चुने जाते थे, जिसमें एक सामान्य श्रेणी से और एक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से होते थे। लेकिन फिर 1961 में एक कानून के जरिए इसे खत्म कर दिया गया था।

गोरखपुर लोकसभा सीट का इतिहास

गोरखपुर लोकसभा सीट पर जब साल 1962 में मतदान हुआ तो एक बार फिर से कांग्रेस ने ही जीत हासिल की थी। पार्टी की तरफ से उतरे सिंहासन सिंह ने हिंदू महासभा के दिग्विजय नाथ को हराया था। दिग्विजय नाथ गोरखनाथ मठ के महंत थे। गोरक्षपीठ और गोरखपुर लोकसभा सीट का संबंध कितना लंबा है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। 1967 में एक बार फिर महंत दिग्विजय नाथ मैदान में थे लेकिन इस बार वह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़े थे और उन्होंने अपनी हार का भी बदला ले लिया। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के एसएल सक्सेना को 42,715 वोट से हरा दिया। 1969 में दिग्विजयनाथ के निधन के बाद हुए उप-चुनाव में महंत अवैद्यनाथ जीतकर लोकसभा पहुंचे। अवैद्यनाथ महंत दिग्विजय नाथ के उत्तराधिकारी थे। अवैद्यनाथ बाद में रामजन्मभूमि आंदोलन के अहम किरदारों में शामिल हुए।

1971- नरसिंह नारायण
1977- हरिकेश बहादुर
1980 -हरिकेश बहादुर
1984 – मदन पांडेय
1989- महंत अवैद्यनाथ
1991- अवैद्यनाथ
1996- महंत अवैद्यनाथ

इसके बाद आता है वो साल जिसने गोरखपुर का इतिहास ही बदल दिया, क्योंकि साल 1998 में राजनीति में एंट्री होती है योगी आदित्यनाथ की, जो मौजूदा समय में यूपी के सीएम हैं। योगी आदित्यनाथ महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी थे। खास बात यह है कि उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में जीत हासिल की थी। उस दौरान उनकी उम्र 26 साल थी। 2004 के चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने जीत की हैट्रिक लगाई।

2009 का लोकसभा चुनाव बेहद ही खास था, क्योंकि बीजेपी ने फिर से योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताया तो कांग्रेस ने भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी को टिकट दिया था। हालांकि जीत योगी आदित्यनाथ की ही हुई थी। 2014 में भी योगी आदित्यनाथ। वहीं, साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत मिली। ऐसे में योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गए।

वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने भोजपुरी कलाकार रवि किशन को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने जीत भी हासिल की। वहीं, अब 2024 के चुनावों की बात करते हैं तो गोरखपुर सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा की तरफ से मौजूदा सांसद रवि किशन मैदान में हैं। वहीं सपा ने भोजपुरी कलाकार काजल निषाद को चेहरा बनाया है। इसके अलावा, बसपा ने जावेद सिमनानी को मैदान में उतारा है।

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