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दान विवाद के बाद राम मंदिर ट्रस्ट का एक्शन, ‘CEO की कमी से हुई चूक’, गोविंद देव गिरि बोले- अब पेशेवर प्रबंधन होगा…

Ram Mandir Donation Theft

Ram Mandir Donation Theft: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्रशासन और दान प्रबंधन को पेशेवर और व्यवस्थित बनाने के लिए पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे और सुरक्षा की बेहतर निगरानी के लिए ‘पेशेवर नौकरशाही अनुशासन’ की आवश्यकता है।

Ram Mandir Donation Theft: 3 सदस्यीय समिति करेगी CEO का चयन

ट्रस्ट ने एक 3-सदस्यीय चयन समिति का गठन किया है जो नए सीईओ का चुनाव करेगी। इस कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल हैं। दान से जुड़े विवादों के बीच, महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। बजरंग बाग्र को नया महासचिव नियुक्त किया गया है।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा, “यह सब सीईओ की अनुपस्थिति के कारण हुआ, क्योंकि निगरानी के कार्य के लिए पेशेवर नौकरशाही लोगों द्वारा लाए जाने वाले अनुशासन की आवश्यकता होती है। हमने यहां उस तरह की पेशेवर निगरानी नहीं की, और यह परिणाम हुआ। इसलिए, हम एक सीईओ नियुक्त करेंगे। हमने तीन नामों का चयन और सिफारिश करने के लिए एक समिति का गठन किया है, और हम उनमें से एक का चयन करेंगे।” (Ram Mandir Donation Theft)

चंपत राय की ईमानदारी पर भरोसा, लेकिन नियुक्तियों में लापरवाही स्वीकार: ट्रस्ट

गोविंद महाराज ने चंपत राय पर भी भरोसा जताया, जिन्होंने हाल ही में नैतिक आधार पर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। कोषाध्यक्ष ने कहा कि चंपत राय की ईमानदारी पर अभी भी कोई संदेह नहीं है, लेकिन इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि राय ने कुछ लोगों को नियुक्त करने में लापरवाही बरती थी।

कोषाध्यक्ष ने कहा, “जब मैं कहता हूं कि वह निर्दोष है, तो मेरा मतलब है कि इस पूरे घोटाले में उनकी कोई व्यक्तिगत संलिप्तता हो ही नहीं सकती। मैं उन्हें 32 वर्षों से जानता हूं, इसलिए मैं कल्पना भी नहीं कर सकता कि वह इस तरह की किसी चीज में शामिल हो सकता है। अब, यह उसके चरित्र को दर्शाता है। हमें अब भी उसकी ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं है। हालांकि, यह मानना पड़ेगा कि वह अपने काम के प्रति लापरवाह था, आखिरकार उसने एक अपराधी को अपना ड्राइवर नियुक्त किया। चाबी उसी के हाथ में थी और वही सब कुछ नियंत्रित करता था।” (Ram Mandir Donation Theft)

दान घोटाले के बाद एक्शन मोड में ट्रस्ट

गोविंद महाराज ने मंदिर के दान की कथित हेराफेरी के लिए गिरफ्तार चालक राम यादव (तिन्नू यादव) को सीधे तौर पर दोषी ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि चालक पर अन्य लोगों द्वारा धन के गबन को अंजाम देने के लिए दबाव डाला गया हो सकता है। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि यह सब उसके ड्राइवर ने किया था। मुझे तो यह भी शक है कि ड्राइवर का बाहरी लोगों से संबंध था। उन्होंने ही शायद उसे ऐसा करने के लिए उकसाया और उनसे जानकारी दिलवाई। मुझे अक्सर लगता है कि यह सब किसी और की साजिश थी।”

महाराज ने आगे कहा, “यह सब हो रहा था, फिर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। यह हमारे लिए दुख, पीड़ा और शर्म की बात है। हमें इस पर शर्म आती है।” (Ram Mandir Donation Theft)

तीन और आरोपियों की कस्टडी रिमांड की तैयारी

इस बीच, श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के कथित गबन की जांच तेज हो गई है और अयोध्या पुलिस जांच को आगे बढ़ाने के लिए तीन और आरोपियों की हिरासत में लेने की तैयारी कर रही है। अयोध्या पुलिस करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्रा और लव कुश मिश्रा नाम के तीन और आरोपियों की कस्टडी रिमांड लेने के लिए अदालत का रुख कर रही है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है।

मुख्य आरोपी से 13 घंटे की पूछताछ के बाद कार, नकदी और आभूषण बरामद

मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला से हुई 13 घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस ने उसकी मारुति ब्रेज़ा कार (जो कथित तौर पर चोरी के पैसों से भाई के नाम पर खरीदी गई थी) और लाखों रुपये के आभूषण बरामद किए हैं। इससे पहले न्यायालय ने गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा था, जिसके बाद पुलिस को जेल के भीतर भी इनसे पूछताछ करने की अनुमति मिल चुकी है। SIT दान के पैसों की गिनती और लेनदेन के रिकॉर्ड खंगालने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ब्रांच मैनेजर समेत 10 बैंक कर्मियों से भी पूछताछ कर रही है। (Ram Mandir Donation Theft)

SIT की प्रारंभिक जांच के बड़े खुलासे

सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से पता चला है कि आरोपी दान पेटी (हुंडी) से पैसे निकालते समय कैमरों के व्यू को ब्लॉक कर देते थे। वे पैसों के बंडल को अपने कपड़ों और मोजों में छिपाकर मंदिर के वॉशरूम में रख देते थे और बाद में धीरे-धीरे बाहर निकालते थे। बैंक रिकॉर्ड की तुलना से सामने आया है कि मामला उजागर होने से पहले मंदिर के चढ़ावे से प्रतिदिन लगभग ₹6 से ₹8 लाख की हेराफेरी की जा रही थी।

जांच एजेंसियों ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से अब तक लगभग ₹79.85 लाख नकद, विदेशी मुद्रा (1,121 अमेरिकी डॉलर), और सोना-चांदी बरामद किया है। एसआईटी आरोपियों द्वारा वेतन (₹18,000–₹20,000) से अधिक की खरीदी गई बेनामी संपत्तियों, जैसे ₹1.5 करोड़ की जमीन और ₹40 लाख के फ्लैट की भी कड़ाई से जांच कर रही है। (Ram Mandir Donation Theft)

प्रशासनिक और नीतिगत बदलाव

इस विवाद के सामने आने के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसी बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने घोषणा की कि ट्रस्ट की बैठक के बाद चंपत राय के महासचिव पद और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं।

एसआईटी अब पिछले 5 वर्षों के दौरान ट्रस्ट के खातों, निर्माण खर्चों और दान में मिले सोने-चांदी के रिकॉर्ड का दोबारा विस्तृत ऑडिट (Re-audit) करने की तैयारी में है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए दान काउंटरों पर काम करने वालों के लिए बिना जेब वाला ड्रेस कोड लागू करने और एक नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति का प्रस्ताव रखा गया है। (Ram Mandir Donation Theft)



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