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परशुराम जयंती आज, जानें पूजा करने का शुभ-मुहूर्त

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Parshuram Jayanti Today: आज यानि 10 मई को अक्षय तृतीया के साथ परशुराम जयंती भी पूरे देश में मनाई जा रही है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम जयंती मनाई जाती है। इसी दिन अक्षय तृतीया का भी त्योहार मनाया जाता है। परशुराम को भगवान विष्णु का छठवां अवतार माना जाता है। आइए जानते हैंं भगवान परशुराम के बारे में…

परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार थे। उनका जन्म त्रेतायुग में हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन जन्म लेने के कारण ही परशुराम की शक्ति भी अक्षय थी। वे भगवान शिव और विष्णु के संयुक्त अवतार माने जाते हैं। शास्त्रों में उन्हें अमर माना गया है।

बता दें कि भगवान शिव से उन्हें कई अद्वितीय शस्त्र भी प्राप्त हुए। इन्हीं में से एक था भगवान शिव का परशु, जिसे फरसा या कुल्हाड़ी भी कहा जाता हैं। यह इन्हें बहुत प्रिय था। वे इसे हमेशा अपने साथ रखते थे। परशु धारण करने की वजह से उनका नाम परशुराम पड़ा था।

इन शुभ मुहूर्त में करें परशुराम की पूजा

परशुराम की पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 7:44 बजे से 9:15 बजे तक अमृत काल में रहेगा। उसके बाद सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा।

परशुराम की ऐसे करें पूजा

प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र पहनें। घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करके भगवान परशुराम की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद प्रतिमा को गंगाजल, दूध और पंचामृत से स्नान कराएं। प्रतिमा को लाल वस्त्र पहनाएं। चंदन, फूल, फल, मिठाई आदि से प्रतिमा को सजाएं। धूप, दीप जलाकर आरती और मंत्रों का जाप करें। पूजा समाप्त होने के बाद अंत में प्रसाद वितरित करें।

परशुराम जी की आरती

ओउम जय परशुधारी, स्वामी जय परशुधारी।
सुर नर मुनिजन सेवत, श्रीपति अवतारी।। ओउम जय।।
जमदग्नी सुत नरसिंह, मां रेणुका जाया।
मार्तण्ड भृगु वंशज, त्रिभुवन यश छाया।। ओउम जय।।
कांधे सूत्र जनेऊ, गल रुद्राक्ष माला।
चरण खड़ाऊं शोभे, तिलक त्रिपुण्ड भाला।। ओउम जय।।
ताम्र श्याम घन केशा, शीश जटा बांधी।
सुजन हेतु ऋतु मधुमय, दुष्ट दलन आंधी।। ओउम जय।।
मुख रवि तेज विराजत, रक्त वर्ण नैना।
दीन-हीन गो विप्रन, रक्षक दिन रैना।। ओउम जय।।
कर शोभित बर परशु, निगमागम ज्ञाता।
कंध चार-शर वैष्णव, ब्राह्मण कुल त्राता।। ओउम जय।।
माता पिता तुम स्वामी, मीत सखा मेरे।
मेरी बिरत संभारो, द्वार पड़ा मैं तेरे।। ओउम जय।।
अजर-अमर श्री परशुराम की, आरती जो गावे।
पूर्णेन्दु शिव साखि, सुख सम्पति पावे।। ओउम जय।।

परशुराम जी के मंत्र

ॐ जमदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो राम: प्रचोदयात्।

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