Lok Sabha passes Public Examination Amendment Bill: संसद के मानसून सत्र के दौरान ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ को विपक्ष के भारी हंगामे और तीखी बहस के बीच 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में ध्वनि मत से पास कर दिया गया है। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा 27 जुलाई 2026 को पेश किए गए इस विधेयक पर सदन में लगभग 9 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
Lok Sabha passes Public Examination Amendment Bill: विधेयक के मुख्य कड़े प्रावधान
यह विधेयक ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन करता है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा माफिया पर लगाम लगाना है। इसमें कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत संगठित अपराध के मामलों में दोषियों को न्यूनतम 7 साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा तय की गई है।
पेपर लीक में शामिल संस्थाओं और अपराधियों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। मामलों की दैनिक सुनवाई और त्वरित न्याय के लिए राज्यों में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (Fast-Track Courts) का गठन किया जाएगा, जिन्हें चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा। इसके अलावा, पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच को 2 महीने के भीतर पूरा करने की समय-सीमा अनिवार्य की गई है। संगठित अपराध में संलिप्त पाए जाने वाले परीक्षा केंद्रों या संस्थानों की संपत्तियों को कुर्क और जब्त किया जा सकेगा। (Lok Sabha passes Public Examination Amendment Bill)
बहस के दौरान विपक्ष के आरोप और तर्क
विपक्ष ने हाल ही में हुए NEET परीक्षा विवाद और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सरकार को जमकर घेरा। चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विधेयक पर करीब 50 मिनट तक अपनी बात रखी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार की तीखी आलोचना करते हुए इस संशोधन विधेयक को महज एक “दिखावा” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून परीक्षा की अनियमितताओं को रोकने में सरकार की विफलता को छुपाने की कोशिश है।
प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों ने संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पेलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया और सरकार से जवाब मांगा। केसी वेणुगोपाल और हनुमान बेनीवाल जैसे सांसदों ने तर्क दिया कि केवल कड़े कानून बनाना काफी नहीं है, बल्कि परीक्षा माफिया और उन्हें राजनीतिक संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी है। बेनीवाल ने आरोपियों के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट को अदालत की मांग पर अनिवार्य करने की वकालत की। (Lok Sabha passes Public Examination Amendment Bill)
सरकार का पक्ष और प्रतिक्रिया
वहीं, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह विधेयक देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के हक व भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लाया गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की मांग पर बहस की अवधि को पहले से बढ़ाकर 10 घंटे तक करने की मंजूरी दी थी, ताकि सभी दल अपनी बात रख सकें। सरकार का दावा है कि इस ऐतिहासिक कदम के जरिए परीक्षा प्रणालियों (जैसे UPSC, SSC, NTA, रेलवे और बैंकिंग) को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा और परीक्षा माफियाओं के मन में डर पैदा होगा।
विपक्ष के तमाम वॉकआउट और भारी शोर-शराबे के बीच इस बिल को लोकसभा की हरी झंडी मिल चुकी है और अब इसे आगे की विधायी प्रक्रिया के लिए राज्यसभा भेजा जाएगा। (Lok Sabha passes Public Examination Amendment Bill)











