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Delhi Student Protest 2026: दिल्ली की सड़कों पर छात्रों का महाआंदोलन; जानिए जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक क्या हुआ

Delhi Student Protest

20 जुलाई 2026 की सुबह दिल्ली में सिर्फ मूसलाधार बारिश नहीं हो रही थी, बल्कि देश की राजधानी एक बड़े सियासी और सामाजिक आंदोलन की गवाह बन रही थी। संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले, दिल्ली की सड़कों पर युवाओं और छात्रों का एक अभूतपूर्व हुजूम उमड़ पड़ा। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन का असर अब केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सीधे सत्ता के गलियारों तक दस्तक दे दी है।

इस बड़े घटनाक्रम को समझने के लिए हमें Delhi Student Protest 2026 के पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ना होगा। यह आंदोलन पिछले कई महीनों से देश के युवाओं, परीक्षा प्रणाली से असंतुष्ट छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के भीतर जमा हो रहे आक्रोश का नतीजा है। भारी बारिश और प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद हजारों की संख्या में पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने यह साफ कर दिया कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।

सोनम वांगचुक की अस्पताल रवानगी और अभिजीत दीपके का अनशन: कैसे गरमाया माहौल?

इस आंदोलन में शनिवार को उस समय एक बड़ा मोड़ आया जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को वहां से हटाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचा दिया। वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने की खबर जैसे ही फैली, आंदोलनकारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इसके विरोध में युवा नेता अभिजीत दीपके तुरंत अनशन पर बैठ गए, जिससे आंदोलन की आग और भड़क गई।

सोमवार की सुबह आंदोलन की रणनीति में एक नया बदलाव देखने को मिला। सोनम वांगचुक ने अस्पताल से ही संदेश भेजकर अभिजीत दीपके से अनशन खत्म करने का अनुरोध किया ताकि वे खुद इस बड़े मार्च का कुशल नेतृत्व कर सकें। वांगचुक के इस आग्रह के बाद दीपके ने अपना अनशन समाप्त कर दिया और सभी प्रदर्शनकारी संसद की तरफ कूच करने की तैयारियों में जुट गए।

सुबह 9 बजे जंतर-मंतर की तस्वीर: भारी बारिश में भी डटे रहे हजारों युवा

सोमवार सुबह करीब 9 बजे तक जंतर-मंतर छावनियों और प्रदर्शनकारियों के नारों से गूंज उठा था। लगातार हो रही तेज बारिश भी छात्रों के हौसलों को डिगा नहीं सकी। कोई छाता लेकर खड़ा था, कोई रेनकोट में था, तो सैकड़ों छात्र पूरी तरह भीगने के बाद भी हाथों में तख्तियां और बैनर लिए नारेबाजी कर रहे थे। जंतर-मंतर पर तिल रखने तक की जगह शेष नहीं बची थी।

सोशल मीडिया पर पल-पल की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने लगे, जिसने पूरे देश का ध्यान इस प्रदर्शन की तरफ खींच लिया। छात्रों का एक ही नारा था कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं होता, वे दिल्ली से वापस नहीं लौटेंगे। युवाओं के इस जज्बे ने प्रशासनिक अमले को भी हैरान कर दिया और आनन-फानन में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करना पड़ा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: बंद किए गए मेट्रो गेट और RAF की हुई तैनाती

दूसरी तरफ, दिल्ली प्रशासन और पुलिस भी इस बड़े प्रदर्शन को रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद थे। संसद भवन की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ-साथ रैपिड एक्शन获 (RAF) की कंपनियों को संवेदनशील चौराहों पर तैनात कर दिया गया था। पूरे संसद मार्ग को लोहे के ऊंचे बैरिकेड्स से पाट दिया गया था।

आंदोलनकारियों की भीड़ को संसद तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कई महत्वपूर्ण मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद कर दिए। इस कदम के कारण आम यात्रियों को थोड़ी परेशानी जरूर हुई, लेकिन पुलिस का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को एक जगह इकट्ठा होने से रोकना था। इसके बावजूद, छात्रों की टोलियां अलग-अलग रास्तों से संसद मार्ग की तरफ बढ़ती रहीं।

संसद मार्ग पर पहला बड़ा टकराव: पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की

दोपहर होते-होते जैसे ही हजारों छात्रों के हुजूम ने संसद भवन की तरफ अपने कदम बढ़ाए, माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए लगातार घोषणाएं कीं और छात्रों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने व पीछे हटने की अपील की। लेकिन उग्र हो चुकी भीड़ संसद के घेराव की जिद पर अड़ी रही।

बैरिकेड्स के पास पहुंचते ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पहली सीधी भिड़ंत देखने को मिला। जोश से भरे युवाओं ने पुलिस द्वारा लगाए गए भारी बैरिकेड्स को हटाने और लांघने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों में तीखी धक्का-मुक्की शुरू हो गई। जो आंदोलन सुबह तक शांतिपूर्ण दिख रहा था, वह अब पूरी तरह से टकराव की स्थिति में बदल चुका था।

हालात हुए बेकाबू: झड़प, पथराव और सोशल मीडिया पर दावों की जंग

इसके बाद के कुछ घंटे बेहद तनावपूर्ण रहे। संसद मार्ग के आसपास के इलाकों से पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की खबरें आने लगीं। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाने लगा कि पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया है, जबकि पुलिस प्रशासन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया है।

इस झड़प के दौरान कुछ जगहों से पथराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिसमें दिल्ली पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के घायल होने की आधिकारिक सूचना मिली। इसी बीच सोशल मीडिया पर CJP की तरफ से एक पोस्ट शेयर की गई कि अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने तुरंत बयान जारी कर इस दावे का खंडन किया और कहा कि दीपके को हिरासत में नहीं लिया गया है।

पर्दे के पीछे की बातचीत: जेपी नड्डा के आवास पर पहुंचे छात्र नेता

जब सड़कों पर संग्राम छिड़ा हुआ था, ठीक उसी समय सरकार की तरफ से गतिरोध को खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता भी खोला गया। सुबह के समय केंद्रीय मंत्रियों की तरफ से आंदोलनकारी नेताओं से संपर्क साधा गया, जिसके बाद CJP के प्रमुख नेता आशुतोष रांका और सौरव दास केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर चर्चा के लिए पहुंचे।

हालांकि, यह मुलाकात भी इतनी आसान नहीं रही। छात्र नेताओं को केंद्रीय मंत्री से मिलने के लिए करीब दो घंटे से ज्यादा का लंबा इंतजार करना पड़ा। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू हुई। भले ही यह मुलाकात बहुत लंबी नहीं चली, लेकिन इस पूरे आंदोलन के दौरान यह पहला मौका था जब सरकार सीधे तौर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठी थी।

Dharmendra Pradhan को हटाने की मांग: ज्ञापन में शामिल रहे कई बड़े मुद्दे

इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान छात्र नेताओं ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा को अपनी मांगों का एक विस्तृत लिखित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाने की थी। इसके साथ ही देश की मौजूदा परीक्षा प्रणाली में व्यापक और पारदर्शी बदलाव करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

ज्ञापन में सोनम वांगचुक को पूरी आजादी देने और छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने जैसे बिंदु भी शामिल थे। बैठक के बाद बाहर आए आशुतोष रांका और सौरव दास ने media को बताया कि मंत्री ने उनकी बातों को ध्यान से सुना है, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक कोई ठोस या लिखित आश्वासन नहीं मिला है। यही वजह है कि नेताओं ने आंदोलन को जारी रखने का फैसला किया है।

तीन मोर्चों पर लड़ी गई यह जंग और भविष्य की राजनीति

20 जुलाई 2026 का यह दिन देश के छात्र आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम को देखें तो यह लड़ाई तीन अलग-अलग स्तरों पर एक साथ चलती दिखाई दी—पहली सड़क पर पुलिस और छात्रों के बीच, दूसरी राजनीतिक पटल पर सरकार पर दबाव बनाने की, और तीसरी सोशल मीडिया पर नैरेटिव सेट करने की।

Delhi Student Protest 2026 ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि युवाओं का यह गुस्सा अब किसी एक व्यक्ति या एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे देश के राजनीतिक परिदृश्य को हिलाकर रख दिया है। सरकार के साथ हुई पहली दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के कारण आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर घमासान और तेज होने के पूरे आसार हैं।

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