उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को लखनऊ से कानपुर तक की अपनी यात्रा ट्रेन से पूरी की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की जनता से की गई ‘ईंधन बचाओ’ की विशेष अपील के अनुपालन में राज्यपाल ने वीआईपी संस्कृति और लग्जरी गाड़ियों के काफिले को छोड़कर रेलवे से सफर करने का फैसला किया। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का गरिमामयी पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनकी पहली आधिकारिक रेल यात्रा थी, जिसने प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारों में खूब सुर्खियां बटोरी हैं।
इस ऐतिहासिक Anandiben Patel Train Journey की शुरुआत गुरुवार सुबह लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन से हुई, जहाँ राज्यपाल उत्सर्ग एक्सप्रेस से कानपुर सेंट्रल के लिए रवाना हुईं। वे इस ट्रेन की एसी प्रथम (AC First Class) बोगी में आम यात्रियों के साथ सफर करती नजर आईं। राज्यपाल के इस सादगी भरे कदम की सोशल मीडिया पर काफी सराहना की जा रही है, क्योंकि सुरक्षा और प्रोटोकॉल के भारी तामझाम के बीच किसी संवैधानिक प्रमुख का इस तरह आम जनता के बीच ट्रेन से यात्रा करना एक दुर्लभ घटना माना जाता है।
सुबह 6 बजे से डटे रहे अफसर: ऐशबाग स्टेशन पर रही सुरक्षा की कड़ी घेराबंदी
राज्यपाल की इस प्रस्तावित रेल यात्रा को लेकर राजभवन की ओर से काफी समय पहले ही रेलवे प्रशासन को एक आधिकारिक पत्र भेजकर सूचित कर दिया गया था। चूंकि मामला राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की सुरक्षा से जुड़ा था, इसलिए रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। राज्यपाल के आगमन के दौरान आम यात्रियों को कोई बड़ी असुविधा न हो और सुरक्षा भी अभेद्य रहे, इसके लिए स्टेशन पर तड़के ही अधिकारियों की फौज तैनात हो गई थी।
आमतौर पर सुबह आठ बजे की पाली में आने वाले रेलवे कर्मचारियों को विशेष वीआईपी ड्यूटी के कारण दो घंटे पहले यानी सुबह छह बजे ही स्टेशन पर बुला लिया गया था। आईजी रेलवे (IG Railway) और आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त सहित लखनऊ पुलिस के कई आला अधिकारी सुबह से ही ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर डेरा डाले हुए थे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का वीआईपी काफिला ट्रेन के आने से काफी पहले ही सुबह करीब 7:23 बजे ऐशबाग के प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंच गया था।
सादगी की मिसाल: बैट्री कार छोड़कर 100 मीटर पैदल चलीं राज्यपाल
इस यात्रा के दौरान राज्यपाल की सादगी और अनुशासन देखकर वहां मौजूद रेल यात्री और कर्मचारी दंग रह गए। उत्सर्ग एक्सप्रेस में राज्यपाल के लिए आरक्षित की गई एच-1 (H-1) बोगी ट्रेन में काफी पीछे की ओर लगी हुई थी। इस वजह से सुरक्षा बलों ने मुख्य गेट के बजाय साइड गेट से राज्यपाल को प्लेटफार्म पर प्रवेश कराया ताकि स्टेशन पर ज्यादा अफरा-तफरी का माहौल न बने।
प्लेटफार्म नंबर एक पर राज्यपाल को उनकी बोगी तक ले जाने के लिए रेलवे ने बकायदा एक आधुनिक बैट्री चालित कार (Battery Car) का इंतजाम कर रखा था। लेकिन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उस कार में बैठने से साफ मना कर दिया। वे अपनी सुरक्षा टीम के साथ प्लेटफार्म पर करीब 100 मीटर पैदल चलकर अपनी बोगी तक पहुंचीं। राज्यपाल का यह व्यावहारिक दृष्टिकोण वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा, जिससे Anandiben Patel Train Journey का यह सफर और भी खास बन गया।
ट्रेन छूटते ही मची खलबली, 5 बोगियां आगे बढ़ते ही हुई चेन पुलिंग
ऐशबाग रेलवे स्टेशन पर जैसे ही ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई और वह अपनी मंजिल की तरफ आगे बढ़ी, वैसे ही एक अप्रत्याशित घटना घट गई। उत्सर्ग एक्सप्रेस ने जैसे ही रफ्तार पकड़नी शुरू की और उसकी लगभग पांच बोगियां प्लेटफार्म से आगे निकली ही थीं कि अचानक किसी यात्री ने आपातकालीन चेन पुलिंग (Chain Pulling) कर दी। वीआईपी सफर के दौरान अचानक ट्रेन के रुक जाने से रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव फूल गए।
ट्रेन के रुकते ही आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) के जवान दौड़कर उस बोगी के पास पहुंचे जहाँ से चेन पुलिंग की गई थी। मौके पर जाकर जब जांच की गई तो मामला बेहद संवेदनशील लेकिन इंसानी भूल का निकला। दरअसल, उस बोगी में अपने छोटे बच्चों के साथ सफर कर रही एक महिला यात्री गहरी नींद के कारण अपना स्टेशन आने पर समय से उतर नहीं पाई थी। जैसे ही उसकी आंख खुली तो ट्रेन चल चुकी थी, जिसके बाद हड़बड़ाहट में उसने चेन खींच दी। महिला की मजबूरी को देखते हुए सुरक्षा बलों ने उसे सुरक्षित नीचे उतारा।
कंट्रोल रूम से हुई लाइव मॉनिटरिंग; कानपुर सेंट्रल पर हुआ भव्य स्वागत
चेन पुलिंग की इस छोटी सी बाधा को तुरंत दूर करने के बाद उत्सर्ग एक्सप्रेस को कानपुर के लिए रवाना किया गया। लखनऊ से कानपुर तक के इस पूरे सफर के दौरान ट्रेन के संचालन में बीच में दोबारा कोई रुकावट न आए, इसके लिए उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल प्रशासन ने एक विशेष टीम गठित की थी। ऑपरेटिंग अनुभाग के वरिष्ठ अधिकारी पूरे सफर के दौरान मुख्य कंट्रोल रूम में डटे रहे और ट्रेन की स्पीड व सिग्नलों की लाइव मॉनिटरिंग करते रहे।
निर्धारित समय पर जब ट्रेन कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची, तो वहां भी सुरक्षा के कड़े प्रबंध दिखाई दिए। जिला प्रशासन और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुलदस्ता भेंट कर राज्यपाल का भव्य स्वागत किया। राज्यपाल ने भी रेलवे के इंतजामों और सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया। इस यात्रा के जरिए उन्होंने समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया कि ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों की बचत के लिए बड़े पदों पर बैठे लोगों को भी सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) का उपयोग करने से कतराना नहीं चाहिए।
शुक्रवार को वापसी और अगला सफर: वंदे भारत एक्सप्रेस से जाएंगी प्रयागराज
राजभवन से मिली जानकारी के अनुसार, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल कानपुर में अपने निर्धारित कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद शुक्रवार को इसी उत्सर्ग एक्सप्रेस ट्रेन से ही लखनऊ वापस लौटेंगी। उनकी इस वापसी यात्रा को लेकर भी कानपुर और लखनऊ के दोनों रेल मंडलों को विशेष अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक या तकनीकी खराबी का सामना न करना पड़े।
इस पहली सफल यात्रा के बाद राज्यपाल ने अपने आगामी दौरों के लिए भी रेलवे को ही प्राथमिकता देने का फैसला किया है। कानपुर के बाद उनकी अगली बड़ी यात्रा लखनऊ से पवित्र नगरी प्रयागराज के बीच होगी। इस सफर के लिए उन्होंने भारत की सबसे आधुनिक और हाई-स्पीड सेमी-हाई स्पीड ट्रेन यानी वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat Express) को चुना है। राज्यपाल के इन बैक-टू-बैक रेल दौरों से साफ है कि वे सरकारी संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना चाहती हैं।
वीआईपी कल्चर के खिलाफ एक बड़ा संदेश
अंत में, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा की गई यह रेल यात्रा भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में वीआईपी कल्चर (VIP Culture) को कम करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम है। आमतौर पर देखा जाता है कि किसी राज्य के राज्यपाल या मुख्यमंत्री के सड़क मार्ग से गुजरने पर घंटों तक ट्रैफिक रोक दिया जाता है, जिससे आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। साथ ही गाड़ियों के बड़े काफिले से भारी मात्रा में कीमती ईंधन की भी बर्बादी होती है।
ऐसे में राज्यपाल का यह कदम न केवल पर्यावरण और सरकारी खजाने के लिहाज से फायदेमंद है, बल्कि यह आम जनता के बीच उनके विश्वास को भी मजबूत करता है। Anandiben Patel Train Journey की यह पूरी रिपोर्ट हमें यह बताती है कि यदि देश के शीर्ष पदों पर बैठे लोग प्रधानमंत्री की ‘ईंधन बचाओ’ जैसी अपीलों को इस तरह गंभीरता से लेंगे, तभी देश में एक वास्तविक और बड़ा बदलाव आ सकता है। उम्मीद है कि भविष्य में अन्य राज्यों के प्रशासनिक प्रमुख भी इस सादगी भरे रास्ते को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।











