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UCC और अग्निवीर पर मोदी की अग्निपरीक्षा

NDA के घटक दलों की बैसाखी पर बन रही नई सरकार के घटक दलों को क्या अभी भी मोदी की दी गई गारंटी मंजूर होगी। मोदी की कई फ्लैगशिप योजनाएं क्या अब ठंडे बस्ते में जाने वाली हैं! हालात तो यही बयां कर रहे हैं।
Prime Minister Narendra Modi with leaders during the NDA leaders meeting after the Lok Sabha election results, at his 7, LKM, residence in New Delhi on Wednesday

Lok Sabha Election 2024 के नतीजे आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या मोदी की गारंटी अभी भी पूरी हो पाएगी। NDA के घटक दलों की बैसाखी पर बन रही नई सरकार के घटक दलों को क्या अभी भी मोदी की दी गई गारंटी मंजूर होगी? मोदी की कई फ्लैगशिप योजनाएं क्या अब ठंडे बस्ते में जाने वाली हैं! हालात तो यही बयां कर रहे हैं। Uniform Civil Code (UCC) और अग्निवीर जैसी मोदी सरकार की कम से कम चार बड़ी योजनाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है। नीतीश कुमार की JDU ने तो सरकार बनने से पहले ही साफ कर दिया है कि UCC और अग्निवीर पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उसी तरह TDP मुखिया चंद्रबाबू नायडू भी UCC को लेकर पहले से ही ऐसी बातें करते आ रहे हैं।

नई सरकार के गठन से पहले ही NDA के घटक दलों ने BJP पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। BJP पर दबाव दो तरह से है। पहला मंत्रिमंडल बंटवारे को लेकर और दूसरा मोदी की फ्लैगशिप योजनाओं को लेकर। UCC , अग्निवीर, वन नेशन वन इलेक्शन और परिसीमन सहित कुछ और ऐसी योजनाएं हैं जिसे लेकर सहयोगी दलों ने BJP पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

JDU नेता केसी त्यागी का कहना है कि नीतीश कुमार ने UCC को लेकर विधि आयोग को चिट्ठी भी लिखी थी। चिट्ठी में कहा गया था कि उसे लागू करने से पहले सभी स्टेक होल्डर्स से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए। त्यागी के मुताबिक, JDU का अभी भी यही रुख है। वहीं मोदी की अग्निवीर योजना का JDU ने खुलेआम विरोध शुरू कर दिया है। केसी त्यागी का कहना है कि अग्निवीर योजना पर नए तरीके से सोचने की जरूरत है। इस योजना को लेकर बिहार के लोगों में भारी असंतोष है। ये असंतोष लोकसभा चुनाव के दौरान भी दिखा। त्यागी ने कहा कि अग्निवीर योजना को लेकर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है। बता दें कि पिछले साल जुलाई में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान नीतीश कुमार ने कहा था कि बिहार में किसी भी कीमत पर UCC लागू नहीं होगा।

UCC , अग्निवीर, वन नेशन वन पेंशन, परिसीमन BJP की सबसे बड़ी योजनाएं मानी जाती रही हैं। BJP ने इन योजनाओं को मुद्दा भी बनाया और जोर शोर से उठाया भी। मोदी सरकार की इन बड़ी योजनाओं की धमक पूरे देश में देखी गई और BJP ने इसे लोगों तक पहुंचाने में कोई कोर कसर भी नहीं छोड़ी थी। बात करते हैं यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC की। नरेंद्र मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल में UCC को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था। उत्तराखंड की धामी सरकार ने तो चुनाव से कुछ महीने पहले इसे अपने यहां लागू भी कर दिया।

ये बात भी सच है कि UCC लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन गया। उत्तराखंड में UCC लागू करने के बाद पुष्कर सिंह धामी का कद BJP में एकदम से बढ़ गया। BJP शासित कई और राज्यों ने भी कहा कि वे उत्तराखंड की तर्ज पर अपने यहां भी UCC लागू करेंगें। अब बात करते हैं TDP की। BJP के बाद 16 सीटें लाने वाले NDA के सबसे बड़े घटक दल TDP के मुखिया चंद्र बाबू नायडू भी UCC के विरोध में रहे हैं। नायडू ने 20 जुलाई 2023 को पार्टी दफ्तर में मिलने आए मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरूओं से कहा था कि वे उनके साथ हैं और UCC को लेकर मुस्लिम समाज की चिंताओं को संसद में उठाएंगें।

कुल मिलाकर मोदी की नई सरकार के गठन से पहले ही दबाव की राजनीति शुरू हो गई है। दबाव मोदी की गारंटी या उनकी कई योजनाओं को लेकर है। साथ ही मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर भी। NDA के घटक दलों ने BJP पर प्रेशर टैक्टिस शुरू कर दी है। हालांकि सार्वजनिक तौर पर तो किसी पार्टी ने ये नहीं कहा है कि उसे कौन कौन सा मंत्रालय चाहिए लेकिन जानकारों का कहना है कि नरेंद्र मोदी की अगुआई में NDA की बुधवार को हुई बैठक में नीतीश कुमार और चंद्र बाबू नायडू ने मोदी जी को मनचाहे मंत्रालयों की लिस्ट पकड़ा दी है।

केसी त्यागी का कहना है कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वायपेयी के समय भी JDU NDA गठबंधन का हिस्सा थी। केसी त्यागी के मुताबिक वाजपेयी सरकार में JDU के पास रक्षा मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, रेल मंत्रालय, संचार मंत्रालय और टेलीकॉम मंत्रालय था। त्यागी ने इन मंत्रालयों का नाम लेकर ये इशारा कर दिया है कि JDU नई सरकार में कौन कौन सा मंत्रालय चाह रही है। कुल मिलाकर सीटें कम होने के बाद BJP इस बार NDA के साथ मिलकर सरकार तो बना रही है लेकिन मोदी के लिए गठबंधन की इस सरकार को चलाना चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

माना जा रहा है कि BJP के कमजोर होने की वजह से घटक दलों का दबाव सरकार पर रहेगा। नरेंद्र मोदी दो बार से भारी भरकम सीटों के साथ सरकार चलाते रहे हैं और घटक दलों को लेकर सरकार पर न तो दबाव था और ना ही डर। दूसरी बड़ी बात गठबंधन सरकार चलाने के अनुभव को लेकर भी है। अब देखना होगा कि न मौजूदा परिस्थिति में नरेंद्र मोदी गठबंधन की इस नई सरकार को कितने बेहतर ढंग से चलाते हैं।

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