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श्रेष्ठ भारत (Shresth Bharat) | Hindi News

“जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था” :अटल बिहारी

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आज भारत के अनमोल रत्न कवि, देशभक्त, तीन बार रहे प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती है। उनके जन्मदिन को देशभर में “सुशासन दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इस बार 99वीं जयंती पर भाजपा इसे यादगार बनाने के लिए देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित करने वाली है।हमेशा की तरह इस खास मौके पर पीएम मोदी अटल स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने देश भर के पार्टी पदाधिकारियों से सभी बूथों पर  पूर्व पीएम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और उनके अद्भुत व्यक्तित्व पर चर्चा करने को कहा है।

कवि, पत्रकार और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 1924 में आज ही मध्यप्रदेश में हुआ था। ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज से स्नातक किया । राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर के लिए कानपुर के डीएवी कालेज गए। यहां उनके पिता ने भी दाखिला लिया और दोनों हास्टल के एक ही कमरे में रहते थे। 1942 में 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य बने।

1951 में बनी जनसंघ पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक रहे। 1975 में लगी इमरजेंसी के दौरान जेल गए। 1977 में विदेश मंत्री होने के नाते उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय नेता थे। वे वीर रस के कवि थे। उनकी कविताएं निराशा और अंधकार में उम्मीद और रोशनी की लौ जलाती हैं।

कभी महज़ दो सीटों वाली पार्टी रही भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनाने की उपलब्धि केवल अटल बिहारी वाजपेयी की भारतीय राजनीति में सहज स्वीकार्यता के बूते की बात थी, जिसे भांपते हुए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ को भी लालकृष्ण आडवाणी को पीछे रखकर वाजपेयी को आगे बढ़ाना पड़ा था.

वाजपेयी जी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। पहले 13 दिन तक, फिर 13 महीने तक और उसके बाद 1999 से 2004 तक का कार्यकाल उन्होंने पूरा किया। इस दौरान उन्होंने ये साबित किया कि देश में गठबंधन सरकारों को भी सफलता से चलाया जा सकता है।

अटल जी द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्य

वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान देश में निजीकरण को उस रफ़्तार तक बढ़ाया गया जहां से वापसी की कोई गुंजाइश नहीं बची। वाजपेयी की इस रणनीति के पीछे कॉर्पोरेट समूहों की बीजेपी से सांठगांठ रही होगी हालांकि उस दौर में इसे उनके नज़दीकी रहे प्रमोद महाजन की सोच का असर भी माना गया था।

इतना ही नहीं वाजपेयी से पहले देश में बीमा का क्षेत्र सरकारी कंपनियों के हवाले ही था, लेकिन वाजपेयी सरकार ने इसमें विदेशी निवेश के रास्ते खोले. उन्होंने बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश की सीमा को 26 फ़ीसदी तक किया था, जिसे 2015 में नरेंद्र मोदी सरकार ने बढ़ाकर 49 फ़ीसदी तक कर दिया। 1999 में वाजपेयी ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के एकाधिकार को ख़त्म करते हुए नई टेलिकॉम नीति लागू की थी।

6 से 14 साल के बच्चों को मुफ़्त शिक्षा देने का अभियान वाजपेयी के कार्यकाल में ही शुरू किया गया था। 2000-01 में उन्होंने ये स्कीम लागू की। जिसके चलते बीच में पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों की संख्या में कमी दर्ज की गई। 2000 में जहां 40 फ़ीसदी बच्चे ड्रॉप आउट्स होते थे, उनकी संख्या 2005 आते आते 10 फ़ीसदी के आसपास आ गई थी।

मई 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। ये 1974 के बाद भारत का पहला परमाणु परीक्षण था। वाजपेयी ने परीक्षण ये दिखाने के लिए किय़ा था कि भारत परमाणु संपन्न देश है। हालांकि उनके आलोचक इस परीक्षण की ज़रूरत पर सवाल उठाते रहे हैं, क्योंकि जवाब के तौर पर पाकिस्तान ने भी परमाणु परीक्षण किया था।

तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल जी ने 1999 में पाकिस्तान की सेना द्वारा कारगिल की चोटियों पर कब्जा किए जाने के बाद जून में आपरेशन विजय को हरी झंडी दी। 1998 में पोखरण परीक्षण कराकर खुद को साहसी और सशक्त नेता के तौर पर स्थापित किया। 1992 में पद्म विभूषण और 2015 में भारत रत्न से सम्मानित किए गए। 16 अगस्त, 2018 को दुनिया को अलविदा कह गए।

ऊँचे पहाड़ पर,

पेड़ नहीं लगते,

पौधे नहीं उगते,

न घास ही जमती है।

जमती है सिर्फ़ बर्फ़,

जो कफ़न की तरह सफ़ेद

और मौत की तरह ठंडी होती है

खेलती, खिलखिलाती नदी,

जिसका रूप धारण कर,

अपने भाग्य पर बूँद-बूँद रोती है।

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का होगा लोकार्पण

सोमवार को बटेश्वर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 12.23 करोड़ में बनकर तैयार हुए अटल सांस्कृतिक संकुल केंद्र और उसमें लगी भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का लोकार्पण होगा। संकुल केंद्र में अटल जी की जीवन यात्रा की फाटो गैलरी लगेगी। पत्र-पत्रिकाओं की कटिंग भी देखने को मिलेगी। 

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि संकुल केंद्र की आंतरिक सज्जा एवं फर्नीचर के लिए 2.59 करोड़ तथा पुस्तकालय में किताबों के लिए 5.70 लाख का बजट आवंटित किया है। संकुल केंद्र के भूतल पर स्टेज समेत बहुउद्देशीय हॉल, रिसेप्शन हॉल, लाइब्रेरी, पैंट्री और स्टोर रूम, किचन और टॉयलेट हैं। प्रथम तल पर म्यूजियम, कांफ्रेस हॉल, डोरमेट्री हॉल, डायनिंग हॉल, वर्क स्टेशन, केबिन, रिसेप्शन रूम आदि हैं। वहीं बाहर अटल जी की प्रतिमा के साथ बच्चों के खेलकूद के साधन हैं।

उनकी प्रसिद्ध कविताओं में से एक-

ठन गई!

मौत से ठन गई!

जूझने का मेरा इरादा न था,

मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,

यों लगा ज़िंदगी से बड़ी हो गई

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,

ज़िंदगी-सिलसिला, आज-कल की नहीं

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,

लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,

सामने वार कर फिर मुझे आज़मा

मौत से बेख़बर, ज़िंदगी का सफ़र,

शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,

दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,

न अपनों से बाक़ी है कोई गिला

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए,

आँधियों में जलाए हैं बुझते दिए

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,

नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,

देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई,

मौत से ठन गई।

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