Paper Leak Controversy: भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने देश में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। उनका आरोप है कि एक संगठित ‘पेपर लीक माफिया’ देश के लाखों युवाओं के भविष्य और सपनों को बर्बाद कर रहा है। शुक्रवार को भुवनेश्वर में ‘छात्रों का गूंज’ अभियान के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए चिब ने कहा कि राष्ट्रव्यापी पहल का उद्देश्य उन छात्रों से जुड़ना है, जिन्होंने कथित तौर पर बार-बार पेपर लीक होने की घटनाओं के कारण देश की परीक्षा और प्रशासनिक प्रणालियों में अपना विश्वास खो दिया है।
Paper Leak Controversy: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग
चिब ने कहा, ‘इस अभियान का कारण हमारे देश में लगातार हो रहे पेपर लीक हैं। पेपर लीक करने वाले माफिया को भाजपा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान चला रहे हैं। वे मोदी जी के इशारों पर काम कर रहे हैं। हम इसके खिलाफ अभियान चला रहे हैं… हमारी पहली मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। वे ओडिशा से हैं और ऐसे काम करके वे ओडिशा की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। हम उनका इस्तीफा चाहते हैं।’
चिब ने परीक्षा प्रणाली में पूर्ण सुधार की मांग करते हुए कहा कि छात्र की सफलता वित्तीय क्षमता के बजाय प्रतिभा और कड़ी मेहनत पर निर्भर होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘इसके साथ ही, एक उचित व्यवस्था की आवश्यकता है। अगर एक धर्मेंद्र प्रधान चले जाते हैं, तो दूसरा आ जाएगा जो पेपर लीक करके हजारों करोड़ कमाएगा। हम ऐसी व्यवस्था चाहते हैं, जहां पेपर लीक होने की कोई गुंजाइश न हो। ऐसी व्यवस्था जहां युवा विश्वास कर सकें कि वे कड़ी मेहनत और प्रतिभा के बल पर अपना भविष्य बना सकते हैं—न कि सिर्फ वे जिनके माता-पिता बहुत अमीर हैं और भाजपा नेताओं की जेब में 50 लाख या 1 करोड़ रुपये भर सकते हैं।’ (Paper Leak Controversy)
युवा कांग्रेस ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को बताया सबसे बड़ा मुद्दा
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर कथित पेपर लीक के प्रभाव पर चिंता जताते हुए, युवा कांग्रेस के नेता ने दावा किया कि व्यवस्था के प्रति असंतोष दुखद परिणामों को जन्म दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘आज देश के युवा आत्महत्या कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि चाहे वे कितनी भी मेहनत कर लें, उनका कोई भविष्य नहीं है। इससे हताश होकर वे अपनी जान ले रहे हैं। इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता कि युवाओं का व्यवस्था पर से विश्वास उठ गया है। हम सभी के लिए इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण कुछ नहीं हो सकता कि युवाओं का हमारे देश की व्यवस्था और तंत्र पर से विश्वास उठ गया है। यही सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।’
भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा कि देशभर में छात्र और अभिभावक पेपर लीक से प्रभावित हुए हैं, और परिवारों को कोचिंग के खर्च और वर्षों की तैयारी का बोझ उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘देश भर के छात्र इस मुहिम में शामिल हो रहे हैं क्योंकि कोई भी माता-पिता नहीं चाहते कि उनके बच्चे की वर्षों की मेहनत व्यर्थ जाए। माता-पिता महंगे कोचिंग शुल्क का भुगतान करने के लिए अपने बजट में कटौती करते हैं, और बाद में बच्चों को पता चलता है कि उनका पेपर लीक हो गया था।’
उन्होंने आगे कहा, ‘यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ाता है। कई युवा इस मानसिक दबाव को सहन नहीं कर पाते और आत्महत्या जैसे कदम उठाते हैं, जो उन्हें नहीं उठाने चाहिए। हमारे युवाओं को ऐसे माहौल का सामना नहीं करना चाहिए जहां उन्हें अवसाद में धकेल दिया जाए या आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया जाए। यही कारण है कि यह अभियान चलाया जा रहा है, और हम तब तक संघर्ष करते रहेंगे जब तक यह सफल नहीं हो जाता।’ (Paper Leak Controversy)
पेपर लीक के आरोपों के बीच शिक्षा व्यवस्था पर विपक्ष का निशाना
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर व्यापक हमला करते हुए, चिब ने पार्टी पर राष्ट्र के कल्याण और धार्मिक भावनाओं की तुलना में भ्रष्टाचार को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करना देश के भविष्य को बर्बाद करना है। लेकिन भाजपा को इसकी कोई परवाह नहीं है। धन के लालच में डूबे ये लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, पेपर लीक कर रहे हैं और यहां तक कि मंदिरों में भी ‘चोरी’ कर रहे हैं। इन्हें युवाओं, धर्म या लोगों की आस्था की कोई चिंता नहीं है। इनका एक ही धर्म और एक ही जनक है- पैसा। इसे कमाने के लिए ये खुलेआम भ्रष्टाचार कर रहे हैं।’
NEET से UGC-NET तक पेपर लीक के आरोप, परीक्षा सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा कदम
भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न-पत्रों के समय से पहले बाहर आ जाने या नकल होने की घटनाओं से जुड़ा एक बहुत बड़ा मुद्दा है। हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। नीट-यूजी विवाद (NEET-UG Controversy), मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में पेपर लीक, धांधली और बहुत अधिक अंक आने के गंभीर आरोप लगे थे। (Paper Leak Controversy)
इस कारण छात्रों ने पूरे देश में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए। वहीं, विवादों के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को सख्त और पारदर्शी बनाने के कई कदम उठाए। सरकार ने घोषणा की कि आगे होने वाली परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित (Computer Based Test- CBT) होगी और इसे कई दिनों में आयोजित किया जाएगा।
नीट के बाद यूजीसी-नेट (UGC-NET) की परीक्षा भी विवादों में आ गई है। दावा किया गया है कि 30 जून 2026 में हुई ‘सोशियोलॉजी’ परीक्षा का पेपर पहले ही लीक हो गया था। राजनेताओं ने आरोप लगाया कि करीब 100 पन्नों की एक PDF परीक्षा से पहले ही कुछ लोगों के पास पहुँच गई थी, जिसमें लगभग 90 सवाल असली पेपर से मेल खाते थे। यह भी आरोप है कि इन पेपरों को कुछ राज्यों में लाखों रुपये में बेचा गया। यह पेपर उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में ₹2.25 लाख से ₹2.5 लाख प्रति उम्मीदवार में बेचा जा रहा था। (Paper Leak Controversy)
लगातार पेपर लीक विवादों के बीच 2027 से NEET-UG को CBT मोड में कराने की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेपर लीक के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वर्ष 2027 से NEET-UG परीक्षा पेन-पेपर मोड के बजाय कंप्यूटर आधारित (CBT) होगी। इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा (JEE) की तर्ज पर नीट परीक्षा भी अब एक दिन के बजाय अलग-अलग दिनों में 6 दिनों तक चलेगी।इसके लिए देश भर में 1000 से अधिक सुरक्षित डिजिटल परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे।
इस बीच, लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद संसद की स्थायी समितियों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की समीक्षा शुरू की है। अधिकारियों से पूछा जा रहा है कि सिस्टम में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे। इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा भी की जा रही है। (Paper Leak Controversy)




