श्रेष्ठ भारत (Shresth Bharat) | Hindi News

जानिए आखिर क्यों महादेव की पूजा में वर्जित है शंख, शिवपुराण में कही गई हैं ये बात  

Maha Shivratri | lord Shiva | Uttar Pradesh | SHIVEPURAN | Shreshth UP

हिंदू धर्म में सभी पूजा पाठ में शंख का एक विशेष स्थान है। भारतीय संस्कृति में शंख को सुख-समृद्धि और शांति के लिए शुभ शुरुआत माना जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव की पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित माना जाता है। इसलिए महादेव की पूजा-अर्चना में शंख नहीं बजाया जाता है। भगवान शिव की पूजा में शंख न बजाने के पीछे एक पौराणिक कथा है।

कथा के अनुसार, दैत्यराज दंभ जिनकी कोई संतान नहीं थी। उसने संतान प्राप्ति के लिए दैत्यराज दंभ ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से खुश होकर भगवान विष्णु ने उसको दर्शन दिये। भगवान विष्णु ने दैत्यराज से वर मांगने के लिए कहा, जिस पर दैत्यराज ने उनसे महापराक्रमी पुत्र का वर मांगा। विष्णु जी ने उसके मागे गए वरदान को पूरा किया और दैत्यराज दंभ के यहां पुत्र का जन्म हुआ। उसका नाम शंखचूड़ रखा गया। शंखचूड़ जब थोड़ा बड़ा हुआ तो पुष्कर में ब्रह्माजी को प्रसन्न करने के लिए उसने कठोर तप किया। तप से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उससे वरदान मांगने के लिए कहा। शंखचूड ने ब्रह्माजी से देवताओं से कभी न हारने का वर मांगा। ब्रह्माजी ने उसकी इच्छा पूर्ण करते हुए शंखचूड श्रीकृष्ण कवच और धर्मध्वज की कन्या तुलसी से विवाह करने की आज्ञा देकर चले गए। इसके बाद तुलसी और शंखचूड का विवाह हुआ।    

वरदान मिलने के बाद शंखचूड में अहंकार पैदा हो गया। वरदान के बाद वह किसी भी देवता से नहीं हार सकता था। इसलिए उसने तीनों लोकों पर अपना कब्जा करना शुरू कर दिया। शंखचूड़ के हमलों से हार कर सारे देवता भगवान विष्णु के पास गए। लेकिन, भगवान विष्णु ने ही दंभ को पुत्रवर का वरदान दिया था, इसलिए उन्होंने महादेव की आराधना की।

भगवान विष्णु के कहने पर महादेव शंखचूड का अंत करने चल पड़े। लेकिन, श्रीकृष्ण कवच और तुलसी के पतिव्रत धर्म की वजह से शिवजी भी उसका वध नहीं कर पा रहे थे, जिसके बाद भगवान विष्णु ने ब्राह्मण का रूप धारण किया और शंखचूड से उसका श्रीकृष्ण कवच दान में ले लिया। फिर शंखचूड़ का रूप धारण करके तुलसी के शील का हरण कर लिया। इसके बाद महादेव ने अपने विजय नामक त्रिशूल से शंखचूड का अंत कर दिया। शंखचूड़ की हड्डियों से शंख का जन्म हुआ, जिस शंख का जल भगवान शिव के अलावा सारे देवताओं के लिए उत्तम माना जाता है। इसलिए महादेव की पूजा में कभी भी शंख नहीं बजाया जाता है।

संबंधित खबरें

वीडियो

Latest Hindi NEWS

Ketan Agarwal Murder Case
Ketan Agarwal Murder Case: 'हादसा' नहीं, महीनों की प्लानिंग थी! केतन मर्डर केस में पुलिस के बड़े खुलासे, जांच में सामने आई साजिश की पूरी टाइमलाइन
Bahraich Leopard Attack
Bahraich Leopard Attack: बहराइच में खूंखार तेंदुए का हमला, वनकर्मी समेत 8 लोगों पर हमला; DFO के नेतृत्व में सर्च ऑपरेशन तेज
Akhilesh Yadav Ram Mandir Donation Row
अयोध्या दान विवाद पर गरमाई राजनीति, चंपत राय के इस्तीफे के बाद BJP पर बरसे अखिलेश; बोले- अब खुलेंगे भाजपा के राज...
Ram Mandir Donation Theft Case
Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर ट्रस्ट पर संकट गहराया, दान विवाद के बीच चंपत राय-अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा
Champat Rai Resigns Ram Mandir Trust
Champat Rai Resigns Ram Mandir Trust: SIT की रिपोर्ट के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा
Ram Mandir Donation Controversy
राम जन्मभूमि दान मामले में पुलिस का शिकंजा, मुख्य आरोपी टीनू यादव हिरासत में; SIT जुटा रही साक्ष्य