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सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को निकालने का काम जारी

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उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिल्कयारा सुरंग के ढहने के 11 दिन बाद सुरंग के अंदर फंसे 41 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) ड्रिलिंग के लिए जगह की पहचान की गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम (NHIDCL) के निदेशक अंशू मनीष खुल्को के मुताबिक ‘’ऊर्ध्वाधर ड्रिलिंग के लिए जगह की पहचान कर ली गई है। सुरंग के ऊपर पहाड़ी पर ऊर्ध्वाधर ड्रिलिंग के लिए सड़क का काम लगभग पूरा हो चुका है। 350 मीटर से अधिक की सड़क निर्माण कार्य पूरा हो गया है। बीआरओ सिल्क्यारा और बारकोट दोनों ओर से सड़क बना रहा है।‘’

एक पाइलिंग मशीन जो खराब सड़क होने के कारण कल फंस गई थी। अब सिल्कयारा सुरंग स्थल पर पहुंच गई है। बचावकर्मियों ने ‘क्षैतिज (हॉरिजॉन्टल) ड्रिलिंग’ का प्रयास किया था और फंसे हुए श्रमिकों को एक साथ ठोस पका हुआ भोजन खिलाया था।

भूस्खलन के बाद निर्माणाधीन संरचना के 2 किलोमीटर लंबे हिस्से में 10 दिनों से फंसे 41 मजदूरों को निकालने के लिए कुल पांच एजेंसियों – ओएनजीसी, एसजेवीएनएल, आरवीएनएल, एनएचआईडीसीएल और टीएचडीसीएल – को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

बचावकर्मियों ने सोमवार शाम को 6 इंच चौड़ा पाइप बिछाकर सफलता हासिल की। लेकिन फंसे हुए लोगों को आज केवल केले, संतरे और दवाइयां जैसे फल ही मुहैया कराए गए क्योंकि बेलनाकार प्लास्टिक की बोतलों में खिचड़ी 53 मीटर की दूरी से नहीं गुजर सकती थी। सिल्कयारा सुरंग में फंसे मजदूरों को संरचना के ढहे हुए हिस्से में फंसे भोजन पाइप के माध्यम से मंगलवार रात के खाने के लिए शाकाहारी पुलाव, मटर-पनीर और मक्खन के साथ चपाती की आपूर्ति की गई।

12 नवंबर को सिल्क्यारा से बारकोट तक एक सुरंग के निर्माण के दौरान सुरंग के 60 मीटर के हिस्से में मलबा गिरने के कारण 41 मजदूर फंस गए थे। एनडीएमए अधिकारी ने कहा कि सुरंग धंस गई और सुरंग का दूसरा बारकोट वाला हिस्सा पहले ही बंद हो गया था। क्योंकि उस तरफ का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ था। बचाव दल सोमवार शाम को 6 इंच का पाइप बिछाने में कामयाब रहा जिसके माध्यम से ठोस भोजन और मोबाइल चार्जर सिल्कयारा सुरंग के ढह गए हिस्से के अंदर भेजे गए।

मंगलवार की सुबह बचावकर्मी सुरंग में एक एंडोस्कोपी कैमरा डालने में कामयाब रहे और कैप्चर किए गए पहले दृश्यों से पता चला कि 41 श्रमिकों के पास चलने के लिए सुरंग के अंदर पर्याप्त जगह थी। पिछले 10 दिनों से अंदर फंसे श्रमिकों के दृश्य मंगलवार सुबह सामने आए। जिससे चिंतित रिश्तेदारों को नई उम्मीद मिली है जिनमें से कुछ ध्वस्त सुरंग संरचना के स्थल के बाहर डेरा डाले हुए हैं। 

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