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ट्रम्प की बड़ी डील! अमेरिका-ईरान में ऐतिहासिक शांति समझौता, युद्ध खत्म करने पर बनी सहमति; इजराइल ने जताई नाराजगी

Trump-Iran Peace Deal

Trump-Iran Peace Deal: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक शांति और सीजफायर समझौता हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान सरकार ने इस ऐतिहासिक डील पर अपनी सहमति जताई है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान उप विदेश मंत्री के बीच 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इस शांति समझौते (MoU) पर अंतिम हस्ताक्षर होने की योजना है। वहीं, इस शांति समझौते से इजराइल की सरकार ने सख्त नाराजगी जताई है। इजरायली मंत्रियों का स्पष्ट कहना है कि वे इस डील को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं और लेबनान से अपनी सेना पीछे नहीं हटाएंगे।

Trump-Iran Peace Deal: अमेरिका-ईरान शांति समझौते की 5 बड़ी शर्तें, जानिए कैसे खत्म होगी जंग

इस शांति समझौते के तहत तुरंत युद्ध विराम (Ceasefire), स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से नाकेबंदी हटाना और ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देना शामिल है। अमेरिका, ईरान और लेबनान के मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से युद्ध को रोका जाएगा। अमेरिका और इज़राइल द्वारा कोई नया युद्ध न शुरू करने की गारंटी दी जाएगी। अमेरिका ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा। ईरान के जहाजों पर लगी पाबंदियां खत्म की जाएंगी और उनके फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड जारी किए जाएंगे। ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसके अलावा, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध के बाद पुनर्निर्माण जैसे मुद्दों पर 60 दिनों तक बातचीत जारी रहेगी।

अमेरिका-ईरान समझौते का UN ने किया स्वागत

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। महासचिव ने वार्ता को समर्थन देने में पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की और अन्य क्षेत्रीय देशों की भूमिका के लिए गहरी सराहना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी पक्ष इस गति को बनाए रखेंगे और अंतिम समाधान की दिशा में अपने प्रयासों को दोगुना करेंगे। उन्होंने यह भी दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र एक स्थायी और व्यापक शांति की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का समर्थन करने के लिए तत्पर है। (Trump-Iran Peace Deal)

पीएम मोदी ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का किया स्वागत

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शांति समझौते का दिल से स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में भारी आर्थिक नुकसान हुआ था और कई लोगों की जानें गईं थीं, इसलिए इस जंग का खत्म होना बेहद जरूरी था। सोशल मीडिया एक्स पोस्ट शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का मैं स्वागत करता हूं, जिसने दुनिया भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान पैदा किया है और कई देशों में जानमाल का नुकसान पहुंचाया है। भारत को उम्मीद है कि इस समझौते के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने और नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। हम शेष मुद्दों पर विचार-विमर्श के माध्यम से एक स्थायी अंतिम समझौते तक पहुंचने की उम्मीद करते हैं।”

समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में 4% से अधिक की गिरावट

इस शांति समझौते की खबर आते ही ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में 4% से ज्यादा की भारी गिरावट देखी गई है, जिससे दुनिया को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। ईरान के कुछ कट्टरपंथी और रूढ़िवादी गुट इस समझौते का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह अमेरिका के सामने झुकने जैसा है। इजराइल इस बातचीत का हिस्सा नहीं था और उसने इस समझौते पर अब तक कोई सकारात्मक टिप्पणी नहीं की है, बल्कि समझौते के ऐलान के बीच भी लेबनान पर हमले जारी रखे। (Trump-Iran Peace Deal)

फरवरी में शुरू हुआ था संघर्ष, हॉर्मुज बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ा असर

यह संघर्ष फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान भर में किए गए हमलों के साथ शुरू हुआ। ईरान ने इजरायल और खाड़ी में स्थित अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले करके इसका जवाब दिया। इस लड़ाई के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज प्रभावी रूप से बंद हो गया, जो एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग है, जिससे होकर दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का सामान्य रूप से आवागमन होता है। अप्रैल में हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही है, जिसमें इस हफ्ते दो बार जवाबी हमले भी शामिल हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा गहरा असर, गुटेरेस ने जताई चिंता

रविवार को इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ये हमले युद्धविराम के बावजूद और ऐसे समय में हुए जब वाशिंगटन और तेहरान से शांति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंचने की उम्मीद थी। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है और सभी पक्षों से इस महत्वपूर्ण समय में अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया। उन्होंने अमेरिका और ईरान द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों के सफल परिणाम की आशा भी व्यक्त की। (Trump-Iran Peace Deal)

लेबनान का संकट व्यापक क्षेत्रीय अशांति का हिस्सा है। यह संकट 2 मार्च को शुरू हुआ, अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर बमबारी शुरू करने के कुछ ही दिनों बाद, जिसके चलते लेबनान में हिज़्बुल्लाह आतंकवादियों ने इज़राइल पर गोलीबारी की।



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