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साहिल लोचाव को न्याय की मांग पर सियासत तेज, राहुल गांधी के धरने के बाद दर्ज हुई FIR; भाजपा बोली- अराजकता की राजनीति…

Sahil Lochav Pellet Gun Case

Sahil Lochav Pellet Gun Case: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान छात्र प्रदर्शनकारी साहिल लोचाव पर कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद शुक्रवार को उस समय नया मोड़ ले गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में करीब आठ घंटे के धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज होने को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि भाजपा ने गांधी के प्रदर्शन को राजनीतिक स्टंट और ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करार दिया। लोचाव और कांग्रेस नेताओं के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचे गांधी ने एफआईआर दर्ज होने के बाद कहा कि यह न्याय की दिशा में पहला कदम है, लेकिन उन्होंने मामला दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाए।

गांधी ने कहा कि लोचाव को कथित तौर पर गोली लगने की घटना को लगभग एक महीना बीत चुका है और उसके शरीर में अभी भी छर्रे फंसे हुए हैं। उनके मुताबिक, तीन छर्रे आंख में होने के कारण लोचाव की दृष्टि प्रभावित हुई है, जबकि कुछ अन्य छर्रे उसके दिल के पास हैं। (Sahil Lochav Pellet Gun Case)

Sahil Lochav Pellet Gun Case: गांधी बोले- पुलिस अधिकारी तैयार थे, लेकिन ‘ऊपर से’ डाली जा रही थी बाधा

गांधी ने दावा किया कि वह और उनके समर्थक सुबह करीब 11 से 11:30 बजे पुलिस स्टेशन पहुंचे थे और शाम लगभग सात बजे तक वहीं रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज करने के लिए वरिष्ठ स्तर से मंजूरी का इंतजार किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारी मामला दर्ज करना चाहते थे, लेकिन ऊपर से बाधा डाली जा रही थी। गांधी ने दावा किया कि अंतिम मंजूरी गृह सचिव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 118 और 125 के तहत मामला दर्ज किया है। धारा 118 खतरनाक हथियार या साधनों से स्वेच्छा से चोट या गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है, जबकि धारा 125 ऐसे कृत्यों से जुड़ी है जिनसे किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा पैदा हो। (Sahil Lochav Pellet Gun Case)

कांग्रेस ने केंद्र पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी केंद्र सरकार पर छात्रों के खिलाफ कथित पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल किया कि छात्रों पर कथित गोलीबारी का आदेश किसने दिया था। खड़गे ने दावा किया कि लोचाव और उनकी मां एफआईआर दर्ज कराने के लिए कई बार दिल्ली पुलिस से संपर्क कर चुके थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर शिकायत की पावती, डेली डायरी नंबर या एम्स की मेडिकल-लीगल रिपोर्ट नहीं दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया तथा कई युवक घायल हुए। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस प्रभावित छात्रों के साथ खड़ी रहेगी और उन्हें न्याय दिलाने के लिए लड़ाई जारी रखेगी। (Sahil Lochav Pellet Gun Case)

कांग्रेस के कई अन्य नेताओं ने भी गांधी के धरने का समर्थन किया। सांसद जयराम रमेश ने कहा कि गांधी की दृढ़ता के कारण लोचाव की एफआईआर दर्ज हो सकी। पवन खेड़ा ने कहा कि संज्ञेय अपराध में एफआईआर दर्ज करना पुलिस की कृपा नहीं, बल्कि कानून के तहत उसका दायित्व है।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी एफआईआर दर्ज होने का स्वागत करते हुए कहा कि अब पुलिस को कथित घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। अधीर रंजन चौधरी और सुप्रिया श्रीनेत समेत अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी मामले में हुई देरी पर सवाल उठाए। (Sahil Lochav Pellet Gun Case)

साहिल लोचाव ने राहुल गांधी को दिया धन्यवाद

एफआईआर दर्ज होने के बाद लोचाव ने राहुल गांधी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने गांधी को बताया कि उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है, तो गांधी ने उनसे मिलने और मामला दर्ज कराने में मदद करने का आश्वासन दिया था। लोचाव ने कहा कि वह 14 अगस्त से एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रयास कर रहे थे और यदि विपक्ष के नेता ने उनका साथ नहीं दिया होता, तो शायद मामला दर्ज नहीं हो पाता।

लोचाव के वकील ने भी आरोप लगाया कि परिवार ने कई बार पुलिस से संपर्क किया, लेकिन उन्हें देरी का सामना करना पड़ा। वकील के मुताबिक, 14 अगस्त को कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में शिकायत देने के बाद उसे वापस कर दिया गया और परिवार को लंबे समय तक इंतजार कराया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने मामले को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताते हुए “ऊपर से आदेश” मिलने की बात कही। (Sahil Lochav Pellet Gun Case)

विपक्षी दलों का गांधी को समर्थन

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राहुल गांधी के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी सरकार को जवाबदेह ठहराना है और गांधी वही कर रहे हैं। एनसीपी-एसपी प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि अब जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि कथित तौर पर पेलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

भाजपा ने प्रदर्शन को बताया राजनीतिक स्टंट

भाजपा ने राहुल गांधी के धरने की आलोचना करते हुए कहा कि इस मामले की जांच पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति कर रही है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने गांधी के प्रदर्शन को “सस्ती, ध्यान आकर्षित करने वाली राजनीति” और “कैमरा-केंद्रित नाटक” बताया। भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने भी गांधी पर अराजकता की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति गठित की जा चुकी है तथा जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है। (Sahil Lochav Pellet Gun Case)

भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष के नेता को कानून और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी गांधी पर कानून को अपने हाथ में लेने और अराजकता फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ने कहा कि गांधी इस तरह के विरोध प्रदर्शनों के जरिए अपनी और कांग्रेस की राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने भी गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय जांच प्रक्रिया पर भरोसा करना चाहिए। (Sahil Lochav Pellet Gun Case)

सुप्रीम कोर्ट ने गठित की पांच सदस्यीय समिति

यह विवाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। लोचाव ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। बाद में उनका इलाज लेडी हार्डिंग अस्पताल और एम्स में किया गया। राहुल गाधी ने पहले दावा किया था कि एम्स की मेडिकल रिपोर्ट में लोचाव के शरीर में 200 से अधिक छर्रे पाए गए थे, जिनमें कुछ आंख में और कुछ दिल के पास बताए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित की। समिति पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग, प्रदर्शनकारियों द्वारा हिंसा तथा महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों की तथ्यात्मक जांच करेगी। (Sahil Lochav Pellet Gun Case)

समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायमूर्ति शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले से संबंधित सीसीटीवी और बॉडीकैम फुटेज समिति को सौंपने का भी निर्देश दिया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच के दौरान कथित पेलेट गन के इस्तेमाल, जिम्मेदारी और घटना से जुड़े अन्य आरोपों की पड़ताल किए जाने की उम्मीद है।

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