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MOSCOW EMBASSY में कैसे पकड़ा गया पाकिस्तानी जासूस

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी हमेशा भारत की खुफिया जानकारी इक्ट्ठा करने में लगी रहती है। कभी पैसे के लालच से तो कभी हनी ट्रैप में फंसाकर आईएसआई खुफिया जानकारी निकालती रहती है। साल 2010 में पाकिस्तान दूतावास में काम करने वाली विदेश मंत्रालय की महिला अधिकारी माधुरी गुप्ता को संवेदनशील दस्तावेज एक आईएसआई के एजेंट को देने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। दरअसल माधुरी गुप्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के भारतीय दूतावास में प्रेस अधिकारी थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक आईएसआई एजेंट से हुई. उस आईएसआई एजेंट ने माधुरी को अपने जाल में फंसाना शुरु किया। दोनों के बीच मुलाकातें और बातों का दौर शुरु हुआ जो प्यार में बदल गया। एक बार माधुरी गुप्ता उस एजेंट के जाल में फंसी तो वो एजेंट माधुरी का इस्तेमाल अहम जानकारियां निकालने में करने लगा।

अफगानिस्तान से जुड़े कई दस्तावेज माधुरी ने इस एजेंट को मुहैया कराए। जब रॉ को इसकी भनक मिली तो माधुरी को काम के बहाने भारत बुलाया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में माधुरी ने बताया कि वो एजेंट उन्हें इमोशनल ब्लैकमेल कर रहा था और इसकी वजह से वो उसके जाल में फंसकर खुफिया जानकारी मुहैया करा रही थी।

जासूसी का एक ऐसा ही मामला फिर से सामने आया है। इस बार जासूसी का आरोप लगा है सत्येंद्र सिवाल नाम के शख्स पर जो मॉस्को में भारतीय दूतावास में तैनात था। रूस और भारत के बीच के संबंधों को देखते हुए ये बेहद अहम पोस्टिंग और देश माना जाता है। रूस और भारत के बीच होने वाले तमाम करार इस दूतावास में ही तय किए जाते हैं। हथियारों की खरीद-फरोख्त के सौदे भी इसी दूतावास के माध्यम से किए जाते हैं। सत्येंद्र पर आरोप है कि मॉस्को जाने के बाद वो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में आया और उसके लिए काम करने लगा।

ISI का हैंडलर अक्सर उसे कॉल किया करते थे और सत्येंद्र पैसों के लालच में भारतीय सेना की जानकारियां आईएसआई को देता था। इसकी भनक भारतीय खुफिया एजेंसियों को भी लगी और उन्होंने सत्येंद्र सिवाल पर नजर रखनी शुरु कर दिया। 28 जनवरी को को सत्येन्द्र सिवाल परिवार में एक शादी अटैंड करने के लिए मॉस्को से हापुड़ आया था। 27 साल के सत्येन्द्र सिवाल को विदेश मंत्रालय ने 2021 में सुरक्षा सहायक के तौर पर मॉस्को भेजा था। यह अभी तक साफ नहीं है कि सिवाल पैसे के लिए काम कर रहा था या उसे ISI ने हनीट्रैप में फंसाया था।

अक्सर आईएसआई हनीट्रैप का इस्तेमाल करती है और सरकार में काम करने वाले कर्मचारियों को हुस्न के झांसे में फंसा लेती है। देश में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं जहां पर हनी ट्रैप का इस्तेमाल किया गया था। एटीएस अब सत्येन्द्र के साथ काम करने वाले लोगों के बारे में पता लगा रही है। क्या इस पूरी जासूसी के तार भारत से भी जुड़े हुए हैं या फिर मॉस्को में ही किसी आईएसआई एजेंट के संपर्क में सत्येन्द्र आया। यूपी एटीएस की टीम सत्येन्द्र से पूछताछ कर रही है कि आखिर वो आईएसआई के संपर्क में कैसे आया। पैसों का लेन-देन कैसे होता था, क्या मॉस्को में ही वो किसी पाकिस्तानी एजेंट से मिला करता था या फिर वो केवल फोन से ही उसके संपर्क में था। इन्हीं सब सवालों का जवाब जानने के लिए पुलिस उसके बैंक खातों और मोबाइल फोन को स्कैन कर रही है।

पूछताछ के दौरान उसने भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की बात कबूल की। सिवाल की गिरफ्तारी एटीएस को मिली एक गुमनाम सूचना पर आधारित थी। मॉस्को में भारतीय दूतावास में तैनात सिवाल की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली में सरकारी सूत्रों ने कहा कि विदेश मंत्रालय इस मुद्दे से अवगत है और जांच अधिकारियों के साथ काम कर रहा है।

हापुड़ देहात के शाह मोहिउद्दीनपुर गांव का रहने वाला सत्येन्द्र अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए मॉस्को से घर आया था। सिवाल चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर का है। दो बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि छोटा भाई सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा है। गांव के लोग सत्येन्द्र की गिरफ्तारी से हैरान हैं, उनके मुताबिक सत्येन्द्र और उसका परिवार का व्यवहार अच्छा है और उसका परिवार में भी सज्जन लोग हैं। पुलिस पूछताछ कर पता लगा रही है कि अब तक वो कौन-कौन से राज़ आईएसआई को भेज चुका है।

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