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ममता का कांग्रेस में होगा विलय? सुष्मिता देव के इस्तीफे और 20 सांसदों की बगावत के बाद सोनिया गांधी का ‘मेगा ऑफर’

TMC Merge With Congress 2026: पश्चिम बंगाल की सियासत में इस वक्त एक ऐसा भूचाल आ चुका है, जिसने 2026 की पूरी राजनीतिक बिसात को पलटकर रख दिया है। दरअसल, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 28 साल के इतिहास में आज वो सबसे कठिन दौर आ गया है, जिसकी कल्पना खुद ममता बनर्जी ने कभी नहीं की होगी। मां, माटी, मानुष का किला बगावत के बारूद से ढह रहा है। इसी बीच दिल्ली के सियासी गलियारों से बेहद सनसनीखेज खबर आ रही है कि वजूद बचाने के लिए टीएमसी का कांग्रेस में पूर्ण विलय हो सकता है।TMC Merge With Congress 2026

राज्यसभा में दूसरा बड़ा झटका: सुष्मिता देव का इस्तीफा

ममता बनर्जी को ताजा और करारा झटका उच्च सदन से लगा है। दरअसल, टीएमसी की कद्दावर और वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अचानक पार्टी और संसद से इस्तीफा दे दिया है।

  • एक हफ्ते में दो झटके: सुखेंदु शेखर राय के बाद, महज एक हफ्ते के भीतर संसद से इस्तीफा देने वाली सुष्मिता देव दूसरी बड़ी सांसद बन गई हैं।
  • हिमंता से गुप्त मुलाकात: मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से गुप्त मुलाकात की थी।
  • बीजेपी में एंट्री की चर्चा: कयास लगाए जा रहे हैं कि वे बहुत जल्द बीजेपी का दामन थामकर दोबारा राज्यसभा में वापसी कर सकती हैं।

लोकसभा में महाबगावत: 28 में से 20 सांसदों ने छोड़ा साथ!

बगावत की यह आग सिर्फ राज्यसभा तक सीमित नहीं है। परिणामस्वरूप, लोकसभा में ममता बनर्जी के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है।

  1. काकोली घोष की अगुआई: वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार इस पूरी बगावत का चेहरा बनकर उभरी हैं। उन्होंने 20 बागी सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंप दिया है।
  2. संसदीय ब्लॉक की मांग: बागियों ने संसद के भीतर टीएमसी से अलग एक स्वतंत्र ‘संसदीय ब्लॉक’ और अलग सिटिंग अरेंजमेंट की मांग की है।
  3. सायोनी घोष भी संपर्क में: हाल ही में अपने बयानों के कारण सुर्खियों में आईं टीएमसी की स्टार प्रचारक और लोकसभा सांसद सायोनी घोष की भी इस बागी गुट से बातचीत की चर्चा तेज है।

यही वजह है कि बागी गुट सीधे तौर पर ममता बनर्जी की आंतरिक नीतियों को इस बिखराव के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है।TMC Merge With Congress 2026

बंगाल विधानसभा में भी ‘खेला’: ऋतब्रत बनर्जी बने ‘नेता विपक्ष’

दिल्ली से लेकर कोलकाता तक ममता बनर्जी चौतरफा चक्रव्यूह में घिर चुकी हैं। दरअसल, 3 जून को बंगाल विधानसभा के 80 टीएमसी विधायकों में से 58 बागी विधायकों ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया था।

  • ऋतब्रत बने नए नेता: बागी विधायकों ने निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नया नेता चुन लिया।
  • अध्यक्ष की मंजूरी: विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इस बागी गुट के दावे को स्वीकार करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को ‘नेता विपक्ष’ के रूप में मान्यता दे दी है।
  • इस्तीफों की झड़ी: इसके अलावा संदीपान साहा, अजमल सिद्दीकी, शांतनु सेन (RG कर कांड पर मुखर), अरूप चक्रवर्ती और सुशांत घोष जैसे जमीनी नेता और प्रवक्ता भी नाराजगी जताते हुए पदों से हट चुके हैं।TMC Merge With Congress 2026

सोनिया गांधी का ‘मेगा ऑफर’ और कांग्रेस का राजनीतिक गणित

जब चारों तरफ से किला ढह रहा है, तब एंट्री हुई है देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की। दरअसल, सूत्रों के हवाले से खबर है कि सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी के सामने एक बेहद हैरान करने वाला प्रस्ताव रखा है।

  • विलय का प्रस्ताव: सोनिया गांधी ने टीएमसी का कांग्रेस में पूर्ण विलय करने का ऑफर दिया है।
  • पावरफुल पदों का वादा: इस डील के बदले ममता बनर्जी को कांग्रेस का ‘राष्ट्रीय उपाध्यक्ष’ और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को ‘राष्ट्रीय महासचिव’ का बेहद पावरफुल पद देने की बात कही जा रही है।

इसके पीछे का गणित समझें तो, बंगाल में कांग्रेस लंबे समय से कमजोर है। परिणामस्वरूप, उसे बूथ स्तर पर दोबारा जिंदा होने के लिए ममता के चेहरे और टीएमसी कैडर की सख्त जरूरत है। यही नहीं, अगर यह विलय होता है तो बंगाल में अल्पसंख्यक और बीजेपी विरोधी वोटों का बिखराव पूरी तरह रुक जाएगा, जिससे सीधे तौर पर लेफ्ट फ्रंट हाशिए पर चला जाएगा और बीजेपी को कड़ी चुनौती मिलेगी।TMC Merge With Congress 2026

राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन चौराहे पर ‘दीदी’

ममता बनर्जी के लिए भी इस वक्त यह ऑफर किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी किसी भी तरफ से इस विलय की पुष्टि नहीं की गई है। अंततः, टीएमसी के अंदर मची इस भयंकर भगदड़ ने यह साफ कर दिया है कि बीजेपी और एनडीए की बढ़ती ताकत से निपटने के लिए ममता के पास अब बहुत सीमित विकल्प बचे हैं। यही वजह है कि आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल और देश की राजनीति की नई दिशा तय करने वाले साबित होंगे।TMC Merge With Congress 2026

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