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क्या होती है EVM मशीन? जानें कैसे करती है काम

ऐसे में लोगों के मन में भी ये सवाल उठता है कि आखिर वोटिंग मशीन काम कैसे करती है और इसे हैक किया जा सकता है या नहीं। आइए इन सभी बातों को विस्तार से जान लेते हैं।
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What is EVM: देश में लोकसभा चुनाव 2024 के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आज यानि 4 जून को चुनाव के नतीजे भी सामने आ जाएंगे। ऐसे में EVM की चर्चा होना आम बात है। चुनाव में हारने पर विपक्ष हमेशा जीतने वाली पार्टी पर ईवीएम मशीन को हैक करने का आरोप लगाती है। ऐसे में लोगों के मन में भी ये सवाल उठता है कि आखिर वोटिंग मशीन काम कैसे करती है और इसे हैक किया जा सकता है या नहीं। आइए इन सभी बातों को विस्तार से जान लेते हैं।

EVM से चुनाव प्रक्रिया आसान

भारत में EVM के जरिए ही चुनावी प्रक्रिया को पूरा किया जाता है। EVM का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (Electronic Voting Machine) है। साल 1982 में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) ने पहली बार ईवीएम मशीन का इस्तेमाल किया था। यह मशीन चुनाव प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ ही उसमें तेजी लाती है। वोटिंग मे EVM के इस्तेमाल से चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी की संभावनाएं कम हो जाती हैं।

ऐसे काम करती है EVM मशीन

EVM या वोटिंग मशीन का इस्तेमाल मतदान के दौरान किया जाता है। इसे वोटिंग के अलावा मतों को स्टोर करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। भारत के चुनाव आयोग द्वारा EVM मशीन में स्टोर वोटों की गिनती की जाती है। जिस उम्मीदवार के खाते में सबसे ज्यादा वोट होते हैं, उसकी जीत घोषित कर दी जाती है। EVM में दो यूनिट होती हैं, जो एक पांच मीटर के केबल से जुड़ी होती हैं।

कंट्रोल यूनिट (CU): ये यूनिट पीठासीन अधिकारी यानी रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के पास होती है।

बैलेटिंग यूनिट (BU): ये यूनिट वोटिंग कंपार्टमेंट में रखी होती है, इसी जगह पर आकर लोग वोट डालते हैं।

क्या होता है EVM का VVPAT?

EVM में कई और जरूरी उपकरण भी आते हैं, जिनमें वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) का नाम भी शामिल है। VVPAT में से एक पर्ची निकलती है, इसमें जिस उम्मीदवार को वोट डालते हैं उसकी तस्वीर नजर आती है। इससे वोटर्स को पता लग जाता है कि वोट सही जगह गया है या नहीं।

क्या EVM को हैक करना संभव है?

EVM मशीन एक स्टैंड अलोन मशीन है जो इंटरनेट या किसी दूसरे नेटवर्क से कनेक्ट नहीं होती है। इसे कंप्यूटर से कंट्रोल नहीं किया जाता है। इसलिए इसे हैक करना संभव नहीं है। इसी के साथ ईवीएम मशीन में डेटा के लिए रिसीवर या डिकोडर नहीं होता है, जिसकी वजह से मशीन में किसी वाई-फाई, वायरलेस डिवाइस या ब्लूटूथ डिवाइस से हेक करना संभव नहीं है। वोटिंग के बाद EVM को सीलबंद कर कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है।

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